संवाद सहयोगी, कासगंज : जिले में डेंगू का कहर रोके नहीं रुक रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सारे प्रयास विफल साबित हो रहे हैं। जिले में अब तक डेंगू और बुखार से 113 जानें जा चुकी हैं, लेकिन महकमा के आंकड़े इसके विपरीत है। बुखार से स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में कोई मौत नहीं हुई है।

दो माह हो गए, जिले में बुखार का कहर निरंतर जारी है। बीती 28 अप्रैल को जिले में डेंगू का पहला केस मिला था। बुखार से पटियाली के मुहल्ला काजी में एवं गंजडुंडवारा के गांव गनेशपुर में एक-एक मौत हुई थी। इसी के साथ शुरू हुआ मौत का सिलसिला अभी तक जारी है। कासगंज विकास खंड के गांव फिरोजपुर निवासी सुखराम की 26 वर्षीय पुत्री सुनीता को आठ दिन पूर्व बुखार आया था। स्थानीय चिकित्सक के यहां उपचार कराया गया। लेकिन हालत में सुधार न होने पर सोमवार को स्वजन उसे अलीगढ़ ले गए थे। अलीगढ़ के निजी अस्पताल में उसे भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां भी स्वास्थ्य में लाभ नहीं हुआ और बुधवार की सुबह सुनीता की मौत हो गई। वहीं शहर के मुहल्ला नवाब गली जाटवान निवासी 24 वर्षीय ऊषा पत्नी श्यामवीर की डेंगू बुखार से बरेली में मौत हुई है। इसी क्रम में शहर के मुहल्ला नाथूराम निवासी 30 वर्षीय विशाल पुत्र जानकी की भी डेंगू बुखार से बुधवार को मौत हो गई है। इसी के साथ जिले में बुखार से मरने वालों की संख्या 113 तक जा पहुंची है। चार डेंगू और 72 बुखार के रोगी मिले हैं। दो रोगियों को जिला अस्पताल से रेफर किया गया है। जिला अस्पताल का डेंगू वार्ड बुखार रोगियों से भरा पड़ा है। निजी अस्पतालों में भी हालत यहीं है। छोटे से लेकर बड़े अस्पतालों में भी बैड खाली नहीं हैं। मरीजों को लेने से इनकार कर रहे हैं। सैकड़ों मरीज शहर से बाहर बड़े शहरों में उपचार करा रहे हैं। बुधवार को मुहल्ला नाथूराम निवासी डेंगू पीड़ित गनेश पुत्र रघुनाथ उपचार के अलीगढ़ के निजी अस्पताल में भर्ती थे, जो स्वस्थ होकर वापस लौटे हैं।

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स्वास्थ्य विभाग की 14 टीमें निरंतर बुखार प्रभावित गांवों में जाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। लोगों को सुझाव है कि बुखार की शिकायत होने पर स्वास्थ्य केंद्रों पर जाकर परीक्षण कराकर दवा लें। जिला अस्पताल में डेंगू एवं मलेरिया जांच की व्यवस्था है। लैबों पर जांच न कराकर जिला अस्पताल में जांच कराएं। जिले में अभी तक डेंगू से कोई मौत नहीं हुई है। - डा. अनिल कुमार, सीएमओ

Edited By: Jagran