कासगंज, संवाद सहयोगी : सुरक्षा, सम्मान और स्वाभिमान के लिए संघर्षरत महिलाओं को राजनीति के क्षेत्र में अपेक्षाकृत सम्मान नहीं मिल पाया। जिले की राजनीति में पुरुषों का ही दबदबा रहा है। विधानसभा चुनावों की बात करें तो जिले में सिर्फ दो महिलाएं ही आजादी से अब तक विधानसभा तक पहुंची हैं। पहले तो राजनीतिक दलों ने ही महिलाओं को राजनीति के क्षेत्र में बेहतर सम्मान नहीं दिया और जिन दलों ने सम्मान दिया। उनमें मतदाताओं ने महिला प्रत्याशियों को बहुत ज्यादा योग्य नहीं समझा।

जिले में सिर्फ दो महिलाएं ही ऐसी हैं जो चुनाव जीतकर विधानसभा तक पहुंच सकीं। इनमें शामिल है जिले की महिला नेता उर्मिला अग्निहोत्री। इन्होंने कांग्रेस से वर्ष 1980 और 1985 में सोरों विधानसभा क्षेत्र से जीत हासिल की। इसके अलावा वर्ष 2012 के चुनाव में समाजवादी पार्टी से पटियाली विधानसभा क्षेत्र से नजीबा खान जीनत ने जीत हासिल कर विधानसभा तक पहुंचने का मौका पाया, लेकिन किसी महिला विधायक को मंत्रीमंडल में स्थान नहीं मिला। हालांकि, दोनों महिला विधायक जिस दल से चुनी गई थी प्रदेश में उन्हीं दलों की सरकार रही। हालांकि और भी महिलाएं चुनाव में किस्मत आजमा चुकी हैं। इनमें पूर्व पालिकाध्यक्ष डा. शशीलता चौहान, रेशमा देवी, मुस्कान गुप्ता हो या किरण यादव। इन सभी को मतदाताओं ने अपना आशीर्वाद नहीं दिया। पहले तो राजनीतिक दल आधी आबादी को राजनीति के क्षेत्र में सम्मान देने से कतराते रहे, लेकिन समय-समय पर मतदाताओं ने भी महिला प्रत्याशियों को नकार दिया था। अब इस बार देखना है कि कौन सा दल किस महिला प्रत्याशी को कितना सम्मान देता है। अभी तक बसपा ने दो विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित किए हैं। इनमें कोई महिला प्रत्याशी नहीं हैं। सपा और भाजपा भी सदर विधानसभा सीट पर पुरुष प्रत्याशियों की घोषणा कर चुके है।

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