सोरों, संवाद सूत्र: धार्मिक नगरी को तीर्थ स्थल बनाए जाने को लेकर चलाया जा रहा आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है। संत भी आंदोलन से जुड़ने लगे हैं। मथुरा के संतों ने भी सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग की है। आंदोलन को समर्थन दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सोरों तीर्थ स्थल नहीं बना तो शीघ्र ही धर्म संसद बुलाई जाएगी।

बाल योगी एवं अद्वैत वेदांत प्रचार संघ शिवो ओम के संस्थापक संत स्वामी प्रकाशानंद ने कहा कि प्रदेश सरकार को सूकर क्षेत्र सोरों को तीर्थ स्थल घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सूकर क्षेत्र सोरों हिदू धर्म में आस्था का बड़ा केंद्र है। वराह भगवान की मोक्ष स्थली भागीरथी गंगा व आदि गंगा को अपने आंचल में समेटे हुए है। उन्होंने कहा कि सभी संतो, मंडलेश्वरो और पीठाधीश्वरों से सूकर क्षेत्र सोरों के संबंध में वार्ता की है। इस संबंध में अगर प्रदेश सरकार सोरों को तीर्थ स्थल की घोषणा नहीं करती है तो शीघ्र ही धर्म संसद का आयोजन किया जाएगा। बाल योगी रविदास ने बताया कि संतों का प्रतिनिधिमंडल बनाया गया है जो शीघ्र ही प्रदेश सरकार से मिलेगा और सोरों सूकर क्षेत्र को तीर्थ स्थल बनाए जाने की मांग रखेगा। वराहपीठ के प्रमुख संत स्वामी विदेहानंद महाराज ने बताया कि तीर्थ आंदोलन का नेतृत्व अब जल्द ही संत लोग करेंगे। प्रदेश सरकार को इस पर जल्द निर्णय ले लेना चाहिए नहीं तो वराह पीठ के नेतृत्व में एक बड़ी धर्म संसद का आयोजन होगा। सहावर में भी पहुंचा आंदोलन

सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग को लेकर चलाया जा रहा आंदोलन कस्बों की ओर बढ़ चला है। कस्बा सहावर में आचार्य प्रमोद शर्मा के आवास पर बैठक हुई। इसमें नगला जौहरी, गुनार, सादिकपुर, कनोई, नगला कानिया, दिलावर नगर के लोगों ने भाग लिया। सोरों को तीर्थस्थल घोषित करने की मांग की। बैठक में प्रमोद शर्मा ने कहा कि सोरों तीर्थ स्थल घोषित कराने के लिए हर संघर्ष को तैयार है। प्रदीप रघुनंदन ने कहा कि अब यह आर पार की लड़ाई है। सरकार को तीर्थ स्थल घोषित करना ही होगा। सागर, सत्यम शाक्य, आदित्य कुमार, अंबुज शर्मा, गुरफान खान, आले हसन चौधरी, शब्बीर मौजूद रहे।

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