जेएनएन, कासगंज : प्रवासी मजदूरों के लिए होम क्वारंटाइन की लक्ष्मण रेखा खींची है गांव के स्वास्थ्य की खातिर, ताकि गलती से पहुंचा कोरोना संक्रमण आबादी को अपनी चपेट में न ले सके। इधर बाहर से आए मजदूर एवं उनके परिवार इसे नहीं मान रहे। बार-बार लक्ष्मण लेखा को लांघ रहे हैं, जो आने वाले वक्त में एक बड़ी समस्या बन सकता है। प्रशासन ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए उल्लंघन को गंभीरता से लिया है।

सहावर में मिले संक्रमित ने भी रिपोर्ट आने से पहले होम क्वारंटाइन का उल्लंघन कर ससुराल तक दौड़ लगाई। तैय्यबपुर सुजातगंज में मिला संक्रमित भी गांव में घूमने के साथ नगला पट्टी तक गया था। प्रशासन द्वारा गांव-गांव मुनादी कराई जा रही है, लेकिन इसके बाद भी कुछ लोग हैं जो किसी की बात सुनने को तैयार नहीं। सिढ़पुरा के गांव किलौनी में विगत दिनों सिकंदराराऊ से आया युवक परेशानी बन गया। फरीदाबाद से आठ दिन पहले सिकंदराराऊ अपनी रिश्तेदारी में लौटा युवक मंगलवार को गांव में आया तो उसने दोस्तों के साथ में शराब पी। इसके बाद में कई लोगों के गले भी मिला। यह स्थिति सिर्फ एक गांव की नहीं है, बल्कि मिर्जापुर में दिल्ली से 11 को आए युवक को भी गांव में घूमते हुए देखा जा सकता है। मिर्जापुर का ही एक अन्य व्यक्ति भी गांव में घूम रहा है तो यही हालात नगरिया से डेढ़ किमी दूर सराय गांव के हैं। यहां पर परिवार के साथ आए एक प्रवासी व्यक्ति को डेढ़ किमी दूर नगरिया तक घूमते हुए देखा गया है। --------

गांवों में क्वारंटाइन की योजना फेल :

लॉकडाउन फ‌र्स्ट में जब मजदूरों की घर वापसी शुरू हुई थी। उस वक्त प्रशासन ने गांवों में स्कूल एवं सामुदायिक भवनों पर क्वारंटाइन सेंटर बनाने की योजना बनाई थी। कई प्रधानों ने इसके लिए इंतजाम भी किए। रसोइए लगाए तथा चारपाई एवं गद्दों की व्यवस्था की, लेकिन यह कारगर साबित नहीं हुआ। लोग खाना यहां खाते तथा फसल काटने के लिए खेत पर जाते तो ऐसे में प्रधानों ने भी इन्हें घर भेज दिया। इस वक्त किसी भी गांव में प्रवासियों को क्वारंटाइन करने की योजना नहीं चल रही है।

Posted By: Jagran

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