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कासगंज, जागरण संवाददाता। बीत दिनों खाद्य विभाग की टीम ने रुद्रपुर पापड़-कचरी निर्माण इकाई पर छापा मारा तो यहां पर पापड़ और कचरी जमीन पर बिखरी पड़ी थी। टीम ने जब इसमें मिलाए गए खाद्य रंग के संबंध में पूछा तो निर्माता हड़बड़ा गए। बोले रंग तो फेंक दिया। इससे संदेह हो रहा है इसमें खाद्य रंग के बजाए केमिकल रंग का प्रयोग था। 500 किलोग्राम कचरी की बिक्री पर रोक लगा दी।

यह स्थिति जिले में अधिकांश जगह पर है। होली पर रंग-बिरंगे चिप्स और पापड़ बाजार में ध्यान खींचते हैं। मगर इनका यही कलर रंगों के त्योहार का मजा बिगाड़ सकता है। केमिकल के रंगों का प्रयोग इनमें किया जा रहा है जो खासे नुकसानदेह हैं। वहीं इनके निर्माण के वक्त स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा जा रहा है। जमीन पर ही इन्हें सुखा दिया जाता है, जहां पर धूल के साथ में कीटाणु भी लग सकते हैं। ऐसे में लोगों को होली पर बाजार में बिकने वाले पापड़ और चिप्स से सावधान रहना होगा।

मावा में भी रिफाइंड का प्रयोग :

होली पर मावा (खोआ) की बिक्री बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटी खोआ भी बाजार में आ रहा है। जिसमें रिफाइंड की भी मिलावट हो सकती है। खाद्य विभाग को जानकारी मिली है कुछ लोग पीलापन लाने के लिए रंग का प्रयोग कर रहे हैं जो नुकसानदेह है।

मसाले भी खरीदें संभल कर :

मसालों में भी बड़े पैमाने पर मिलावट हो रही है। खुले मसाले दुकानों पर बिक रहे हैं, जबकि इनमें मिलावट की संभावना है। वहीं कई दुकानदारों के पास लाइसेंस भी नहीं है। ऐसे में विभाग द्वारा छापामारी की जा रही है।

केमिकल रंगों से यह नुकसान

पेट में इंफेक्शन का खतरा।

किडनी पर भी डाल सकते हैं प्रभाव।

लिवर में भी हो सकती है समस्या।

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'खाद्य पदार्थ में खाद्य रंगों का इस्तेमाल भी मानक के तहत किया जाता है। कई जगह पर मिलावटी रंग की आशंका में पापड़ और कचरी से सैंपल भरे हैं। लोग लाइसेंसी दुकानों से बंद मसाले ही खरीदें। खुले मसालों में भी मिलावट की आशंका रहती है।'

-धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी

मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी

कासगंज

Posted By: Jagran

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