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हरिपदी गंगा में तर्पण के लिए तमिलनाडु से पहुंचा जत्था, पितृ पक्ष में सोरों को लेकर है खास मान्यता

By Suman Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Mon, 05 Oct 2026 06:56 PM (IST)

तमिलनाडु से 108 यजमानों का एक जत्था पितृ पक्ष में पूर्वजों के मोक्ष के लिए सोरों के हरिपदी घाट पहुंचा, ...और पढ़ें

सोरों में तर्पण के दौरान पूजा-पाठ करते तमिलनाडु से पहुंचे श्रद्धालु।

सोरों में तर्पण के दौरान पूजा-पाठ करते तमिलनाडु से पहुंचे श्रद्धालु।

HighLights

  1. हरिपदी घाट पर पूर्वजों के मोक्ष हेतु विधि-विधान से संपन्न हुए कर्मकांड।

  2. वराह पुराण के अनुसार सोरों में तर्पण से पितरों को मिलती है मुक्ति।

संवाद सूत्र, सोरों (कासगंज)।  तीर्थ नगरी सोरों और भगवान वराह की मान्यताओं से प्रेरित होकर पहली बार तमिलनाडु से पुरोहित वेंकटेश दो बसों में 108 यजमानों को लेकर सोमवार को हरिपदी घाट पहुंचे। यहां सभी यजमानों ने अपने पूर्वजों की मोक्ष कामना को लेकर विधि-विधान से श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया। कर्मकांड के बाद सभी ने भगवान वराह के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

पहली बार दक्षिण भारत से इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से घाट पर उत्साह का माहौल रहा। मंदिर के पुजारी नरेश त्रिगुणायत ने वराह का चित्र देकर उनका स्वागत किया। जत्थे में शामिल सदस्य तमिल भाषा में बात कर रहे थे। सभी लोगों ने पिंडदान करके पूर्वजों के मोक्ष की कामना की। पितृपक्ष के प्रथम श्राद्ध तर्पण पर शनिवार 26 सितंबर को वराह घाट पर केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा पहुंचे थे।

उन्होंने अपने पूर्वजों की स्मृति में विधि-विधान से जलदान एवं तर्पण किया था। इसके बाद श्री वराह भगवान मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और भगवान वराह के दर्शन कर आशीर्वाद लिया था। इसके अलावा शहीदों के लिए भी तर्पण किया जाएगा।

पुराण में हैं वर्णन

तीर्थ पुरोहित पंडित प्राज्ञेश द्विवेदी ने बताया कि सूकर क्षेत्र की महिमा वराह पुराण में विस्तार से वर्णित है। माता पृथ्वी से संवाद में वराह भगवान कहते हैं कि -गयायाश्च थले मुक्ति, वाराणस्यां जले स्थले, जले स्थले च अंतरिक्षे त्रिधामुक्ति शूकरे। अर्थात गया के थल में मुक्ति है, वाराणसी (काशी) के जल और थल में मुक्ति है, वहीं सूकर क्षेत्र धाम सोरों में जल, थल और अंतरिक्ष तीनों में ही मुक्ति मिलती है।

उन्होंने बताया कि सूकर क्षेत्र में तर्पण-श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि पितृ पक्ष में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही हरिपदी घाट पर मंत्रोच्चार के बीच पंडा-पुरोहित विधि-विधान से श्रद्धालुओं से तर्पण करा रहे हैं। मान्यता है कि भगवान विष्णु के वराह अवतार की इस पावन स्थली पर किया गया पिंडदान सीधे पितरों तक पहुंचता है।

उन्हें जन्म-मरण के बंधन से मुक्त करता है। घाट पर हर बार पंडा-पुरोहित महात्मा गांधी, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद जैसे महापुरुषों के नाम से भी विधि-विधान से तर्पण करा रहे हैं। श्रद्धालु विशेष रूप से संकल्प लेकर आते हैं कि वे शहीदों और पूर्वज राजनेताओं की आत्मा की शांति के लिए तर्पण करेंगे।