UP: कासगंज में झोलाछाप डॉक्टरों का जाल, 300 से अधिक क्लीनिक अवैध; स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई तेज
कासगंज में झोलाछाप चिकित्सक दंपति द्वारा डेढ़ माह के बच्चे की बिक्री के बाद अवैध क्लीनिकों का मुद्दा गरमा गया है।

कासगंज में 300 से अधिक अवैध क्लीनिक।
HighLights
झोलाछाप दंपति ने डेढ़ माह के बच्चे को बेचा।
कासगंज में 300 से अधिक अवैध क्लीनिक संचालित।
स्वास्थ्य विभाग अवैध क्लीनिकों पर कर रहा कार्रवाई।
जागरण संवाददाता, कासगंज। जिले में झोलाछाप चिकित्सक दंपति द्वारा डेढ़ माह के बच्चे की चंद कमीशन पर बिक्री की जाने को लेकर अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है।
जिले में पंजीकृत अस्पतालों, क्लीनिकों की संख्या करीब 70 बताई जा रही है, जबकि हास्पिटल, क्लीनिकों की संख्या 400 से अधिक है। इनमें कितने क्लीनिक स्वास्थ्य विभाग के निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित हो रहे हैं और कितने बिना आवश्यक पंजीकरण के चल रहे हैं। झोलाछाप बच्चों का सौदा करने से भी नहीं चूकते।
सोरों क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टर दंपती ने बच्चे का ही सौदा करा दिया। दंपती ने कमीशन वसूला। इस तरह की शिकायतें आतीं रहतीं हैं। जिले में हास्पिटल और क्लीनिक संचालक मरीजों को बेहतर उपचार का भरोसा देकर निजी अस्पतालों में भेजते हैं। इसके बदले अस्पतालों से करीब 30 प्रतिशत तक कमीशन लेने की बात भी सामने आती है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अस्पतालों व क्लीनिक संचालकों का पक्ष सामने आना बाकी है। झोलाछाप चिकित्सकों के जरिए इलाज कराना मरीजों के लिए जोखिम भरा हो सकता है। पर्याप्त चिकित्सकीय योग्यता और सुविधाओं के अभाव में गलत दवा देने, बीमारी की सही पहचान न होने और समय पर उचित उपचार नहीं मिलने की आशंका रहती है।
गंभीर मरीजों को ऐसे स्थानों पर उपचार मिलने में देरी होने से उनकी परेशानी बढ़ सकती है। जिले में संचालित क्लीनिकों की वास्तविक संख्या, उनके पंजीकरण और चिकित्सकों की योग्यता की जांच करना स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण है।
विभाग की ओर से नियमित निरीक्षण कर बिना अनुमति संचालित प्रतिष्ठानों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, मरीजों को रेफर करने के नाम पर कमीशन के आरोपों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. अजय कुमार ने बताया जिले में संचालित अवैध हास्पिटल और क्लीनिकों पर अभियान चलाकर लगातार कार्रवाई की जा रही है।यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
