कासगंज: गंगा की बाढ़ से जिंदगी दुश्वार, एक दर्जन गांव 25 दिन से पानी में डूबे
कासगंज के नरदोली क्षेत्र में गंगा की बाढ़ से एक दर्जन से अधिक गांव 25 दिनों से जलमग्न हैं, जिससे ...और पढ़ें
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गंगा के पानी से घिरा कासगंज का एक गांव।
जागरण संवाददाता, कासगंज। गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। तहसील क्षेत्र के नरदोली इलाके में बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया है। करीब एक दर्जन से अधिक गांव पिछले 25 दिनों से बाढ़ के पानी की मार झेल रहे हैं। आवागनम के साथ-साथ खान-पान की भी परेशानी बनी हुई है।
प्रभावित गांवों में नगला नरपत, नगला दुर्जन, मूजखेड़ा, नगला खना, नगला जयकिशन, राजेपुर कुर्रा, नगला दीपी, नगला हंसी समेत अन्य गांव शामिल हैं। हरिद्वार, बिजनौर और नरौरा बैराज से पानी छोड़े जाने के बाद गंगा का पानी अब खेतों से निकलकर आबादी में घुस गया है।
कई गांवों में घरों के अंदर घुटनों तक पानी भरा है, जिससे ग्रामीणों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। लोगों को दैनिक जरूरतों को पूरा करने में भी भारी परेशानी हो रही है। निचले इलाकों में पानी का दबाव बढ़ने से कच्चे मकानों की बुनियाद धसने और घरों में रखा सामान खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
लगातार जलभराव के कारण कृषि कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है। करीब तीन सप्ताह से खेतों में पानी भरा होने से खड़ी फसल बर्बाद हो गई है। खेती और मजदूरी पर निर्भर परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। पशुओं के लिए हरे चारे की गंभीर समस्या पैदा हो गई है, ग्रामीणों को दूसरे क्षेत्रों से महंगे दामों पर चारा लाना पड़ रहा है।
बाढ़ के पानी ने गांवों के संपर्क मार्गों को भी काट दिया है। कई रास्ते पूरी तरह जलमग्न हैं, जिससे आवागमन बाधित हो गया है। जरूरी सामान लेने और बीमार लोगों को अस्पताल ले जाने में ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई जगह नाव के सहारे ही आना-जाना हो रहा है।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए हालात सबसे अधिक कठिन बने हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल गंगा का जलस्तर बढ़ने पर यही स्थिति बनती है। नगला हंसी से राजेपुर कुर्रा तक गंगा किनारे पर्याप्त तटबंध न होने के कारण पानी तेजी से गांवों में फैल जाता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल खाद्य सामग्री, पशुओं के लिए चारा, दवाइयां उपलब्ध कराने और भविष्य के लिए स्थायी तटबंध व कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है।
