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कासगंज: गंगा ने फिर पार किया खतरे का निशान, आबादी वाले इलाकों में घुसा नदी का पानी

By Suman Kumar Edited By: Prateek Gupta
Published: Tue, 29 Sep 2026 07:08 PM (IST)

कासगंज में गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया है, जिससे पटियाली तहसील के गांवों में ...और पढ़ें

गंगा में उफान आने के बाद कासगंज में बाढ़ राहत टीमें मुआयना करते हुए।

गंगा में उफान आने के बाद कासगंज में बाढ़ राहत टीमें मुआयना करते हुए।

जागरण संवाददाता, कासगंज। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में हुई चक्रवाती बारिश के बाद गंगा नदी के जलस्तर में एक बार फिर तेजी से बढ़ोतरी शुरू हो गई है। कछला गंगा घाट पर जलस्तर खतरे के निशान से चार सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। इससे पटियाली तहसील क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

सिंचाई विभाग ने तटवर्ती गांवों में निगरानी बढ़ा दी है। ग्रामीणों को नदी के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है। मंगलवार को कछला गंगा घाट पर जलस्तर 162.44 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 162.40 मीटर है। जलस्तर खतरे के निशान से चार सेंटीमीटर ऊपर पहुंचने से तटवर्ती क्षेत्रों में चिंता बढ़ गई है।

इससे पहले भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। नदी में लगातार बढ़ रहे पानी के कारण पटियाली तहसील के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। सिंचाई विभाग के अनुसार बुधवार की सुबह आठ बजे नरौरा बैराज से करीब 1,63,181 क्यूसेक पानी गंगा में छोड़ा गया है।

इसका असर कासगंज जिले में बुधवार को और ज्यादा दिखाई देगा। पानी की मात्रा बढ़ने के कारण गंगा के जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है। विभाग की टीमें तटबंधों और संवेदनशील स्थानों पर नजर रख रही हैं। पिछले दिनों गंगा में पानी बढ़ने से पटियाली तहसील क्षेत्र के कई गांवों में जलभराव की स्थिति बन चुकी थी।

खेतों में पानी पहुंचने से किसानों को फसलों के नुकसान की भी चिंता सता रही है। प्रशासन और सिंचाई विभाग की ओर से ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

नरौरा से करीब डेढ़ लाख अधिक क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इसका प्रभाव बुधवार को कासगंज में दिखाई पड़ने की संभावना है। गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है, इसलिए तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है। विभाग की टीमें लगातार जलस्तर और तटबंधों की स्थिति पर नजर रख रही हैं। ग्रामीणों से अपील है कि वे गंगा के किनारे न जाएं और जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों पर रहें।

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जितेंद्र अग्रवाल, अधीक्षण अभियंता, सिंचाई विभाग