संवाद सूत्र, सोरों : कांवड़ मेला तीर्थ नगरी का बड़ा मेला है। 30 दिन तक चलने वाले इस मेले में कांवड़ के लिए भोलेनाथ के भक्त अन्य जिलों से ही नहीं, प्रदेशों से भी आते हैं। राजस्थान के साथ में मध्य प्रदेश और अन्य जगह के भक्तों की भीड़ सावन के महीने में यहां रहती है। इस दौरान यहां पर 200-250 दुकानें भी सजती हैं। नगर पालिका द्वारा उठाई जाने वाली दुकानों में बड़ा खेल होता है।

नगर पालिका द्वारा कांवड़ मेले में दुकानों के लिए जगह किराए पर उठाई जाती है। इस जगह के किराए को लेकर कांवड़ मेले के बाद हर बार नगर पालिका में भी तकरार होती है। दुकानों की जगह के किराए के नाम पर नगर पालिका द्वारा पर्ची तो कम धनराशि की काटी जाती है, लेकिन दुकानों से अधिक धनराशि वसूली जाती है। एक-एक दुकान से आठ से दस हजार रुपये की वसूली होती है। क्षेत्रीयजनों की मानें तो कुछ दबंग सभासदों की भी इसमें दखलअंदाजी रहती है तथा कांवड़ मेले के बाद में रुपये के बंटवारे को लेकर नगर पालिका में पूर्व के सालों में विवाद भी हुए हैं।

क्षेत्रीयजन भी उठाते हैं किराए पर :

कावंड़ मेले में नगर पालिका की जमीन के अतिरिक्त बाजार में भी घरों के बाहर दुकान सजती हैं। इन दुकानों से किराया घर मालिक वसूलते हैं। महीने भर के यहां भी चार से पांच हजार रुपये प्रति दुकानदार वसूले जाते हैं।

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'दुकानदारों से अधिक वसूली की अभी तक हमें कोई शिकायत नहीं मिली है। हम खुद इसकी अपने स्तर से जांच करेंगे। दुकानदारों से जाकर पूछेंगे कि उन्होंने कितना रुपया दिया है तथा रसीद कितने की मिली है। दुकानदार भी हमें सच्चाई से अवगत कराएं।'

-संतराम सरोज

अधिशासी अभियंता

सोरों

Posted By: Jagran