सोरों (कासगंज), संवाद सूत्र। तुलसीनगरी के नाम से सुप्रसिद्ध तीर्थस्थल सोरो में स्वास्थ्य सेवाएं पंगु नजर आती हैं। गंगा किनारे बसे सोरो में हर दिन श्रृद्धालुओं का जमावड़ा रहता है। उसके बाद भी यहां स्थिति सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से बीमार बना हुआ है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भले ही शासन करोड़ों रूपये खर्च कर रहा हो लेकिन जिले में सरकारी अस्पताल बदइंतजामी से जूझते नजर आते हैं। तीर्थनगरी सोरो का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी इससे अछूता नहीं है। केंद्र पर महिला रोग विशेषज्ञ, नेत्र रोग विशेषज्ञ और सर्जन सहित छह चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं लेकिन तैनाती के नाम पर सिर्फ अधीक्षक डॉ. आकाश कुमार और डॉॅ. प्रशांत की तैनाती है। दो तीन संविदा चिकित्सक भी हैं, लेकिन डॉ. आकाश बैठकों में व्यस्त रहते हैं तो डॉ. प्रशांत अभियानों में व्यस्त रहते हैं। संसाधनों के अभाव में यह चिकित्सक भी सिर्फ ओपीडी सेवा तक सीमित रह जाते हैं। रख रखाव के अभाव में स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित चिकित्सकीय आवास खंडहर में तब्दील हो गए हैं। करीब तीन दशक पहले स्वास्थ्य केंद्र के साथ ही बने इन आवासों की कभी मरम्मत तक नहीं हुई। यहां आने वाले मरीजों को चिकित्सक सिर्फ खांसी, जुकाम और बुखार की दवा ही मुहैया करा पाते हैं। अन्य दवाओं के लिए मरीजों को बाजार का रूख करना पड़ता है।

दशकों पुरानी है एक्सरे मशीन

केंद्र पर एक्सरे मशीन है जो दशकों पुरानी है। इससे लिया हुआ एक्सरा स्पष्ट नहीं दर्शाता है। जबकि गंगा किनारे का इलाका होने के कारण बदलते मौसम में यहां संक्रामक रोगियों की तादाद बढ़ जाती है। एक्सरे सही न होने के कारण रोगियों को निजी एक्सरा सेंटरों या फिर जिला चिकित्सालय जाना पड़ता है।

भर्ती नहीं होते मरीज

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र है लेकिन संसाधनों की कमी के चलते चिकित्सक यहां मरीजों को भर्ती करने से बचते हैं। सामान्य मरीजों को ओपीडी में दवा देकर घर भेज दिया जाता है तो गंभीर मरीजों को रेफर करने में देर नहीं लगाते।

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सिविल वर्क के लिए कोई पैसा नहीं आया है। पैसा आएगा तो आवासों की मरम्मत कराई जाएगी। चिकित्सकों की पूरी जिले में कमी है। एक्सरे मशीन खराब है उसकी जानकारी नहीं है। कोई कमी है तो सही कराई जाएगी। डॉ. प्रतिमा श्रीवास्तव, सीएमओ, कासगंज

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