कासगंज, संवाद सहयोगी : ये परिकल्पना नहीं बल्कि हकीकत है। नदरई गांव के पास ऐसा पुल है, जिस पर ऊपर नहर बहती है और नीचे से नदी। दुनिया भर के सिविल इंजीनियरों के लिए कौतूहल बने इस पुल पर अब नगर वन बसाया जाएगा। हरियाली और तरह-तरह पौधे जब अपने यौवन पर होंगे तो पुल के आकर्षण में चार चांद लग जाएंगे।

शहर से तीन किमी दूर स्थित गांव नदरई में गंग नहर और काली नदी पर ये पुल है। पुल के नीचे काली नदी बहती है और ऊपर से गंग नहर को गुजारा गया है। आयरलैंड के कार्क विश्वविद्यालय के इंजीनियरों ने 1882 में इसे डिजाइन किया। 1885 से 1889 के बीच निर्माण हुआ। इस पुल के पास सिचाई विभाग की काफी जमीन है। ये जमीन अनुपयोगी है। वन विभाग ने यहां 50 हेक्टेअर क्षेत्र में नगर वन विकसित करने की कार्ययोजना बनाई है। शासन ने कार्ययोजना को स्वीकृत दे दी है। सिचाई विभाग से ये जमीन अधिग्रहीत करने को वन विभाग ने प्रशासन के जरिए पत्र लिखा है। ऐसा होगा नगर वन

प्रस्तावित नगर वन में फल, औषधि और छायादार वृक्षों के साथ-साथ खुशबुदार फूलों सहित 55 हजार पौधे रोपे जाएंगे। यहां कैंटीन बनेगी। झूले भी लगाए जाएंगे। देश-दुनिया से आते हैं पुल देखने

पुरातत्व विभाग ने भले ही इस पुल को अपनी धरोहर घोषित नहीं किया है मगर, इसकी ख्याति पूरी दुनिया में है। सिविल इंजीनियरिग छात्र यहां आकर इस पुल की तकनीक का अध्ययन करते हैं। विदेशी पर्यटक भी इसे देखकर दांतों तले अंगुलियां दबा लेते हैं। नगर वन की कार्ययोजना को शासन से हरी झंडी मिल चुकी है। सिचाई विभाग से जमीन का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। मानसून सत्र से पहले नगर वन को विकसित करने का प्रयास करेंगे।

- हरी शुक्ला, डीएफओ

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