त्रिपुरेश अवस्थी, कानपुर देहात : जरीना भले ही अब अपने मासूम लाडले को सीने से लगाकर उज्ज्वल भविष्य के सपने बुनने में जुटी है, लेकिन करीब सवा साल पहले हालात ठीक उलट थे। दुश्वारियों से जूझती जरीना बीते दिनों को याद कर सिहर उठती है। फिर अचानक चेहरा चमक उठता है। ऐसा हो भी तो क्यों नही? आयुष्मान योजना ने उनकी गोद खुशियों से भर दी।

अकबरपुर क्षेत्र के बिगाही गांव निवासी जरीना को जब गर्भवती होने का पता चला तो घर में खुशी की लहर दौड़ गई। गरीबी से जूझते परिवार ने उसकी देखभाल में कोई कसर नहीं छोड़ी। मगर, अचानक परिवार की खुशियों पर पानी फिर गया। डॉक्टरों ने जरीना को हाईरिस्क मदर एनीमिया का खतरा बताया। अंदरूनी समस्या बढ़ने से जरीना की गोद पुष्पित नहीं हो पा रही थी। मजदूरी करने वाले पति तौकीर अली ने उसे कानपुर नगर के बड़े प्राइवेट अस्पताल में दिखाया। यहां 45 हजार रुपये खर्च बता दिया गया। ऐसे में परिवार को सिर्फ मायूसी मिली। तभी प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आयुष्मान भारत के पत्र ने परिवार को रास्ता दिखाया। पति ने जिला अस्पताल महिला अकबरपुर पहुंच आरोग्य मित्र से संपर्क किया और गोल्डन कार्ड बनवा पत्नी को भर्ती कराया। यहां सिर्फ नौ हजार रुपये के पैकेज में सामान्य प्रसव कराया गया। चिकित्सक डॉ. प्रीती भगुंडे ने हाईरिस्क एनीमिया को देखते हुए रक्त भी चढ़ाया। उनकी सलाह पर जरीना ने एक माह तक प्रति सप्ताह अस्पताल में जांच कराते हुए दवाएं ली। अब जरीना पूरी तरह स्वस्थ है।

इंसेट-

आंकड़ों के आईने में योजना

पात्र परिवार-97,282

संबद्ध अस्पताल- 14

पंजीकृत मरीज- 874

लाभांवित मरीज- 794

क्लेम आया- 18,92,500 रुपये

गोल्डन कार्ड- 57,654

1920 मरीज जिले के बाहर जाकर करा चुके इलाज

जिले में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के 97,282 तथा मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के 3893 पात्र हैं। इनमे 1920 मरीज देश भर के विभिन्न अस्पतालों में इलाज करा चुके हैं। आयुष्मान के जिला प्रोग्राम कोआर्डिनेटर डॉ. शिवम गुप्ता ने बताया कि जिले के 1920 मरीजों ने प्रदेश व आयुष्मान योजना वाले राज्यों में संबद्ध अस्पतालों में इलाज कराया है। 1787 मरीजों के इलाज में खर्च 98 लाख 60 हजार 347 रुपये क्लेम भी दिया जा चुका है।

Posted By: Jagran

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