जागरण संवाददाता,कानपुर देहात: जनपद की दक्षिणी सीमा पर स्थित यमुना नदी के बढ़ रहे जल स्तर में मंगलवार को गिरावट शुरू हो गई। इससे यमुना सेंगुर के संगम वाले चपरघटा के आसपास के गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली। लेकिन आढ़न पथार के रास्तों में अभी भी पानी भरे होने से लोगों की परेशानी कम नहीं हो सकी। इन गांवों को आवागमन में अभी भी नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। बाढ़ प्रभावित एक दर्जन गांवों की फसलों को भारी नुकसान होने से किसान मायूस हैं।

यमुना में बाढ़ आने से चपरघटा आढ़न, पथार, मुसरिया, पड़ाव, कुंभापुर आदि गांव चपेट में हैं। रास्तों में पानी भरने से गांव टापू हो जाते हैं। रविवार शाम से यमुना के जलस्तर में हुए इजाफे से सहायक सेंगुर नदी भी उफना गई थी। यमुना में कालपी पुल के पास खतरे का निशान 108 मीटर पर है। सोमवार शाम 5 बजे 105.46 मीटर पर पानी बह रहा था। मंगलवार सुबह से यमुना के जल स्तर में गिरावट होने से लोगों ने राहत की सांस ली। आढ़न पथार व पड़ाव के रास्तों में आठ फुट पानी भरे रहने से लोगों की मुसीबत कम नहीं हो सकी। मजबूरी में लोगों को आवागमन के लिए नाव का सहारा लेना पड़ा।

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बेतार केंद्र कालपी से यमुना के जलस्तर की रिपोर्ट

सुबह 8 बजे - 105.42 मीटर

सुबह 9 बजे - 105. 32 मीटर

सुबह 10 बजे - 105.20 मीटर

सुबह 11 बजे - 105. 11 मीटर

दोपहर 12 बजे - 105.04 मीटर

अपराह्न 1 बजे - 104.98 मीटर

अपराह्न 2 बजे - 104.94 मीटर

अपराह्न 3 बजे - 104.90 मीटर

शाम 4 बजे - 104.86 मीटर

शाम 5 बजे - 104.82 मीटर

शाम 6 बजे - 104.78 मीटर

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आढ़न पथार के रास्ते में पानी भरने से इन गांवों के लोगों को आवागमन के लिए दो नावों की व्यवस्था कराई जा चुकी है। मंगलवार सुबह से ही यमुना के जल स्तर में लगातार गिरावट हो रही है। इससे बाढ़ का खतरा फिलहाल टल गया है। यमुना के जलस्तर पर लगातार नजर रखी जा रही है। पानी कम होने के बाद बीमारी की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट कर दिया गया है। फसलों को हुए नुकसान का आंकलन करा प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। राजीव राज, एसडीएम भोगनीपुर।

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