जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : कोरोना महामारी काल में पर्यावरण संरक्षण के प्रति महिलाओं के नजरिये में भी बदलाव हुआ है। वट सावित्री पूजन से पूर्व महिलाओं ने बरगद का पौधा रोपित कर इसे प्रमाणित भी किया। इतना ही नहीं आसपास की महिलाओं को भी पौधा रोपित करने के लिए जागरूक किया और रोपित पौधे के संरक्षण के लिए संकल्प भी लिया।

पर्यावरण संरक्षण को लेकर दैनिक जागरण की ओर से वट सावित्री पूजन से पूर्व पौधारोपित करने के लिए चलाए गए अभियान को महिलाओं ने सराहा है। गुरुवार को अकबरपुर, डेरापुर, शिवली, सिकंदरा, रसूलाबाद जैसे कस्बे ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्र में भी महिलाओं ने अभियान से जुड़कर बरगद का पौधा रोपित किया। बरगद का पौधा रोपित करने से पूर्व महिलाओं ने आसपास के लोगों को पर्यावरण की महत्ता व धार्मिक महत्व के बारे में बताया। अकबरपुर कस्बा निवासी समाज सेविका कंचन मिश्रा बताती हैं कि बरगद के पौधे का विशेष महत्व है। इसमें औषधीय गुण होने के साथ ही यह 24 घंटे आक्सीजन देता है। इसके साथ ही इसमें देवताओं का वास माना गया है जबकि इसके फल, पत्ती, तने से निकलने वाला दूध व जड़ों में कई असाध्य बीमारी को दूर करने की क्षमता है। कोरोना महामारी काल में लोगों ने इसके महत्व को समझा और इसके औषधीय तत्वों से फायदा भी उठाया है।

कृषि विज्ञान केंद्र दलीप नगर के मौसम विज्ञानी डा. अशोक कुमार कहते हैं कि बरगद में औषधीय गुणों का भंडार है। इसके फल की विशेषता है कि यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सबसे उपर है। इसके साथ ही इसकी दातून से सांस की बीमारी से निजात मिलती है। वहीं तना से निकलने वाला दूध व छाल से सूजन दूर होती है।

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