संवाद सहयोगी, सिकंदरा : राजपुर ब्लाक में बनी पानी टंकी का नलकूप खराब होने के कारण पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। इससे

कस्बावासियों को पेयजल सहित अन्य किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। जिम्मेदारों की उदासीनता ऐसी है कि शिकायत के बाद भी समस्या निस्तारण नहीं कराया जा रहा है। इससे कस्बे के लोगों में अधिकारियों के रवैये के प्रति रोष है।

राजपुर विकास खंड कार्यालय परिसर में बनवाई गई पानी टंकी का एक नलकूप करीब दो वर्ष पूर्व खराब हो गया था। इससे दूसरे नलकूप से कस्बे में जलापूर्ति की जाती थी। तीन दिन पूर्व दूसरे नलकूप का भी वाल्व खराब हो जाने से जलापूर्ति ठप हो गई। इससे लोगों को पेयजल किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। कस्बे के लोगों ने जलापूर्ति सही कराने को लेकर विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया, लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी समस्या बरकरार है। जलापूर्ति न होने के कारण कस्बे के लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है और हैंडपंप पर पानी के लिए लाइन लगानी पड़ रही है। वहीं यह स्थिति पहली बार नहीं बनी बल्कि अक्सर ही विभागीय उदासीनता के कारण लोगों को समस्या से जूझना पड़ता है। आपरेटर अतीक अहमद ने बताया कि नलकूप दो का वाल्व खराब हो गया था, जिसकी जानकारी विभागीय अधिकारियों को दी गई है। ब्लाक प्रमुख चुनाव के चलते मरम्मत में विलंब हुआ, जल्द ही समस्या दूर होगी।

- पेयजल समस्या से कस्बावासियों को अक्सर ही जूझना पड़ता है। क्षेत्र के लोगों को पानी की आपूर्ति के लिए टंकी ही एकमात्र विकल्प है, लेकिन पाइप लाइन भी जर्जर है। विभागीय अधिकारियों को यहां की समस्या से कोई फर्क ही नहीं पड़ता। - सुशील सोनी - पानी टंकी का एक नलकूप तो पहले से ही खराब हो। दूसरे से कार्य हो रहा था, लेकिन वह भी खराब हो गया। शिकायत के बाद भी विभागीय अधिकारियों की उदासीनता ऐसी है कि तीन दिन बाद भी पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। - बाबू बिश्नोई - पेयजल समस्या दूर करने के लिए काफी समय तक लोग विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटते रहे, लेकिन समस्या कोई निस्तारण नहीं कराया गया। पेयजल की समस्या यहां के लिए गंभीर बनी हुई है, लेकिन अधिकारी व जनप्रतिनिधि कोई ध्यान नहीं देता है। - टिकल पाल - यमुना बीहड़ पट्टी के दस्यु प्रभावित इलाके से जुड़े कस्बावासियों की पेयजल व्यवस्था पानी टंकी पर ही निर्भर है। वह भी अक्सर ही खराब रहती है, जिससे कस्बे के लोगों को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ता है। प्यास बुझाने के लिए कस्बे के अंदर दूर-दूर बस्तियों में लगे हैंडपंप ही सहारा बनते हैं। - राजू सविता

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