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उत्तर प्रदेश की प्रतिमा सिंह ने सिलाई से कैसे बदली तकदीर? 20 महिलाओं को भी दिया रोजगार

Published: Fri, 23 Oct 2026 03:32 PM (IST)

कानपुर देहात की प्रतिमा सिंह ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से प्रेरित होकर उमंग स्वयं सहायता समूह बनाया।

प्रतिमा सिंह ने 20 महिलाओं को दिया रोजगार।

प्रतिमा सिंह ने 20 महिलाओं को दिया रोजगार।

HighLights

  1. प्रतिमा सिंह ने उमंग स्वयं सहायता समूह का गठन किया।

  2. पेटीकोट बनाकर 20 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया।

  3. करवा चौथ पर पेटीकोट की मांग बढ़ी, उत्पादन तेज।

जागरण संवाददाता, कानपुर देहात। मन में आत्मनिर्भर बनने का जज्बा हो तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनते। सरवनखेड़ा ब्लाक के कठेठी गांव की प्रतिमा सिंह ने इसे साबित किया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से प्रेरित होकर करीब तीन वर्ष पहले उन्होंने उमंग स्वयं सहायता समूह का गठन किया।

पहले खुद सिलाई सीखी और फिर पेटीकोट तैयार कर बाजार में बिक्री शुरू की। काम बढ़ा तो गांव की गरीब महिलाओं को भी प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ लिया। वर्तमान में उनके साथ 20 महिलाएं पेटीकोट तैयार कर परिवार की आय बढ़ाने में योगदान दे रही हैं। करवा चौथ के चलते मांग बढ़ने पर वह बड़ी मात्रा में पेटीकोट तैयार करा रही हैं।

प्रतिमा सिंह ने बताया कि आत्मनिर्भर बनने की इच्छा पहले से थी, लेकिन परिवार की जिम्मेदारियों के साथ रोजगार शुरू करना आसान नहीं था। इसी दौरान राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की टीम गांव पहुंची और महिलाओं को स्वरोजगार के प्रति जागरूक किया।

इससे उन्हें नई राह मिली। उन्होंने बिना देर किए उमंग स्वयं सहायता समूह बनाया और दूसरी महिलाओं को जोड़कर छोटी-छोटी बचत शुरू की। इसके बाद पैर से चलने वाली सिलाई मशीन खरीदकर प्रशिक्षण लिया। प्रतिमा ने बताया कि शुरुआत में घरों में पहने जाने वाले महिलाओं के कपड़ों की सिलाई करती थी।

काम मिलने लगा, लेकिन कई बार उधारी के कारण मेहनत का पैसा समय पर नहीं मिल पाता था। इससे परेशानी होने लगी। इसी दौरान इंटरनेट मीडिया और यूट्यूब पर पेटीकोट बनाने का तरीका देखा। उन्होंने एक ही उत्पाद पर ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया और पेटीकोट तैयार कर दुकानों में बिक्री शुरू कर दी।

धीरे-धीरे मांग बढ़ी तो उन्होंने सिलाई मशीनों की संख्या बढ़ाई और समूह की महिलाओं को भी काम देना शुरू किया। प्रतिमा के मुताबिक, पेटीकोट की गुणवत्ता बेहतर होने से बाजार में थोक मांग बढ़ी। काम को गति देने के लिए इलेक्ट्रानिक सिलाई मशीनें भी खरीदी। सूती कपड़े की गुणवत्ता के अनुसार तीन प्रकार के पेटीकोट तैयार कराए जाते हैं। प्रतिदिन करीब एक हजार पेटीकोट तैयार करने का लक्ष्य है। करवा चौथ के चलते इन दिनों मांग अधिक है, इसलिए उत्पादन बढ़ाया जा रहा है।

घर बैठे काम, महिलाओं को प्रति पीस पांच से दस रुपये

प्रतिमा कपड़ा, कटिंग, मशीन और बिजली का खर्च खुद उठाती हैं। महिलाओं को पेटीकोट तैयार करने के बदले प्रति पीस पांच से दस रुपये तक पारिश्रमिक दिया जाता है। उनके अनुसार, एक महिला प्रतिदिन करीब 100 पेटीकोट तक तैयार कर लेती है।

महिलाओं को आने-जाने में समय न गंवाना पड़े, इसके लिए मांग और सुविधा के अनुसार घर-घर काम पहुंचाया जाता है। इससे वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ रोजगार भी कर पा रही हैं। समूह के बेहतर संचालन के चलते जिला मुख्यालय माती स्थित देहाती मार्ट में भी उन्हें दुकान आवंटित हुई है। वर्तमान में गजनेर, सरवनखेड़ा, नबीपुर और अकबरपुर की दुकानों पर पेटीकोट भेजे जा रहे हैं।

आगे पुखरायां समेत दूसरे बाजारों में भी बिक्री बढ़ाने की तैयारी है। प्रतिमा ने बताया कि उनकी महीने की कमाई करीब 20 से 30 हजार रुपये तक हो जाती है। एक पुरुष कारीगर के साथ 20 महिलाएं इस काम से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि खुद की आमदनी बढ़ाने के साथ ही समूह से जुड़ी महिलाओं को भी आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का अवसर मिला है।

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