जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : जनता की बेहतर सेहत के लिए सरकारी मद में लाखों करोड़ों खर्च कर फ्री जांच, फ्री दवा देना हो फिर इलाज के लिए पैसों की जरूरत पूरी करने के लिए आयुष्मान योजना, सरकारों की इन महत्वाकांक्षी योजनाओं का दम सरकारी नुमाइंदों की कार्यशैली के चलते टूट रहा है। सरकार देती रही फ्री में दवाएं, जब डाक्टर साहब समय पर आएंगे ही नहीं मरीजों की भीड़ का इलाज निपटाने के अंदाज में ही होगा। चार दिन से अल्ट्रासाउंड का ताला खुलता ही नहीं है और अधिकारी आंखें बंदकर व्यवस्थाओं से बेफिक्र हैं। जनता परेशान होती रही, उनकी बला से। कम से कम जिला अस्पताल अकबरपुर के हालात यही बता रहे हैं।

शहर का मोह न छोड़ने वाले डाक्टरों का देर से आने का रवैया जारी है। सुबह आठ बजे से शुरु होने वाली ओपीडी के लिए नौ बजे के बाद पर्चे बनने शुरु होते है। डाक्टर प्रतिदिन 10 बजे से पहले ओपीडी में नहीं पहुंचते। गुरुवार को अस्पताल पहुंचे एक मरीज घनश्याम का कहना था कि वह आंख दिखाने के लिए ठीक आठ बजे अस्पताल आ गए लेकिन न पर्चा बना न डाक्टर मिले। 8.40 बजे किसी तरह उसका पर्चा बनाकर कमरा नबंर 28 में जाने के लिए कहा। कक्ष खुला मिला लेकिन डाक्टर नहीं मिले।

चर्मरोग कक्ष में डाक्टर का इंतजार कर रही रनियां की सुमन ने बताया कि काफी देर से वह ओपीडी में खड़ी हैं, डाक्टर साहब नहीं है। किसी ने उसे बताया कि वह बड़े साहब के पास हैं। डाक्टरों के इस रवैये की शिकायत पर डीएम, सीएमओ सहित अन्य उच्चाधिकारी अस्पताल का निरीक्षण कर चुके हैं। उन्हें कमियां भी मिली हैं, लेकिन आदेशों के बाद भी डाक्टरों व कर्मचारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इंसेट)

अल्ट्रासाउंड के लिए भटक रही गर्भवती जिला महिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष पर कई दिनों से ताला लटका हुआ है। अस्पताल आने वाली गर्भवती अल्ट्रासाउंड न हो पाने पर वापस लौट रहीं है। वहीं इमरजेंसी की हालत में गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए प्राइवेट सेंटर पर भेज परिजनों की जेब ढीली कराई जा रही है।

महिला अस्पताल में भी यही हाल

पुरुष अस्पताल के साथ महिला अस्पताल भी अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। यहां पर गर्भवती को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती है। कक्ष के बाहर बैठी विनीता निवासी पतरा, रूबी निवासी नाहरपुर रनियां, केशकली, साबिया निवासी अकबरपुर सहित दर्जनों महिलाओं ने बताया कि उन्हें अल्ट्रासाउंड कराने के लिए कहा गया है लेकिन यहां आने पर पता चला कि डाक्टर साहब कई दिनों की छुट्टी पर है। इंसेट) दो वर्ष से नहीं रेडियोलॉजिस्ट

संयुक्त जिला चिकित्सालय में पिछले दो वर्षों से रेडियोलॉजिस्ट नहीं है। जिसके चलते सर्जरी के साथ साथ अन्य मरीजों और सामान्य ओपीडी के मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं हो पा रहा है। कई बार जिला प्रशासन से लेकर शासन स्तर तक लोगों ने शिकायतें दर्ज कराई लेकिन समस्या का हल नहीं निकला। बताते चले कि जिला अस्पताल में डा. जसवंत रत्नाकर की रेडियोलॉजिस्ट के पद पर तैनाती थी। वर्ष 2016 में उनका गैर जनपद स्थानांतरण हो गया। इसके बाद किसी की तैनाती नहीं की गई। - व्यवस्थाओं में सुधार लाया जा रहा है, डाक्टरों को समय से आने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

पंकज श्रीवास्तव, सीएमएस

By Jagran