जागरण संवाददाता, कानपुर देहात: एनटीजी की सख्ती के बाद हड़बड़ी में जिले के तीन निकायों ने सुरक्षित क्षेत्र की भूमि यानी चरागाह व खलिहान की भूमि कूड़ा डंप बनाने के लिए चिह्नित कर दी। अब इसमें भू प्रयोग न बदले जाने की अड़चन सामने आ गई। तीनों निकायों को अन्य कोई भूमि चिह्नित करने को कहा गया है।

नगर निकायों से निकलने वाला ठोस कूड़ा डंपिग बड़ी समस्या बनी है। अब तक अधिकांश निकाय बस्ती के बीच में खाली प्लाट, तालाब किनारे या फिर खुली भूमि पर कूड़ा-कचरा एकत्र कर रहे थे। इससे निकाय का परिवेश गंदा होने के साथ स्वास्थ्य समस्या की आशंका बनी रहती है। निकाय साफ सुथरा रहे और निकलने वाले ठोस कचरे का निस्तारण सही तरीके से किया जाए इसको लेकर राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण गंभीर है। इसी को लेकर ठोस अपशिष्ट निस्तारण एनजीटी ने अनिवार्य कर दिया है। इसे सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया तो जिले की शिवली निकाय ने गाटा संख्या 28 क 29 में रकबा 0.205 हेक्टेयर खाद के गड्ढ़ों की भूमि चिह्नित कर दी। रसूलाबाद नगर पंचायत ने गाटा संख्या 5379 में रकबा 1.608 हेक्टेयर चरागाह की सुरक्षित भूमि कूड़ा डंप के लिए प्रस्तावित कर दी जबकि डेरापुर निकाय में चिह्नित की गई गाटा संख्या 724 में 0.418 हेक्टेयर भूमि खलिहान की है। आरक्षित श्रेणी की इन भूमि प्रकारों का भू प्रयोग का परिवर्तन नहीं हो सकता है। पिछले माह बैठक में यह स्थिति सामने आयी थी। अब डीएम ने इन निकायों की चिह्नित की गई सुरक्षित श्रेणी की भूमि पर कूड़ा डंप न बनाने की स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। सभी निकायों को दूसरी भूमि चिह्नित कराने को कहा गया है। तीन निकायों ने सुरक्षित श्रेणी की भूमि कूड़ा डंप बनाने के लिए चिह्नित की थी। इस पर आपत्ति जताई गई है। निकायों को नवीन परती, ऊसर या बंजर भूमि चिह्नित करने को कहा गया है।

राकेश कुमार सिंह, डीएम कानपुर देहात

Posted By: Jagran

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