जागरण संवाददाता, कानपुर देहात : शनिवार रात डेढ़ बजे। अकबरपुर सीएचसी के लेबर रूम का दरवाजा पीट रहा एक व्यक्ति चिल्लाता रहा-'डाक्टर साहेब जल्दी आव, डाक्टर साहेब जल्दी आव देखौ हमाई पत्नी के दरद बढि़ गवा है.।' दस मिनट बाद डॉक्टर और नर्स निकलकर प्रसूता के पास गई तो बच्चे का सिर बाहर निकल चुका था। दोनों प्रसूता को स्टेचर से ले जाने के बजाय पैदल ही लेबर रूम तक ले गई। इसके बाद पति के हाथ में बच्चा थमा डॉक्टर बोलीं, इसे जल्दी जिला अस्पताल ले जाओ, आक्सीजन की जरूरत है। जिला अस्पताल पहुंचने पर पता चला, बच्चे की मौत हो चुकी है।

अकबरपुर ब्लाक के हीरा नगर निवासी पंकज की पत्नी रागिनी को आशा बहू सरोज के साथ लेकर शनिवार रात दस बजे एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचे। रात करीब डेढ़ बजे रागिनी को प्रसव पीड़ा होने लगी। पति ने डॉक्टर को आवाज लगाई लेकिन, कोई नहीं आया। वह आधे घंटे इधर-उधर बेहाल हो कभी पत्नी को सांत्वना देता तो कभी बिलखते हुए डाक्टर से विनती करने पहुंच जाता। उसकी इस हालत पर लेबर रूप में मौजूद डाक्टर गजाला, स्टाफ नर्स सविता, वार्ड आया संगीता ने जरा भी तरस नहीं खाया। पति ने लेबर रूम का दरवाजा पीटता रहा तो दस मिनट बाद डाक्टर गजला, नर्स के साथ वहां पहुंची। प्रसूता को सहारा देकर पैदल ही लेबर रूम ले गईं। कुछ देर बाद नर्स बच्चे को कपड़े में लपेट कर लाई और आक्सीजन की जरूरत बता पति से जिला अस्पताल ले जाने को कहा। पति ने एंबुलेंस के लिए कहा तो जवाब मिला कि इतनी रात में एंबुलेंस कहां है, अपने साधन से लेकर जाओ। रात के करीब ढाई बजे पंकज नवजात को रिश्तेदार महिला की मदद से लेकर बाइक से जिला अस्पताल पहुंचे। नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई मौजूद स्टाफ ने नवजात को मृत घोषित कर दिया। पंकज की शिकायत पर सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे सदर एसडीएम आनंद कुमार सिंह सीएचसी पहुंचे तो वहां पर भर्ती अन्य प्रसूताओं ने भी स्टाफ की लापरवाही उजागर की। इधर, सीएचसी के चिकित्सा अधीक्षक एचआइ खान और डॉक्टर गजाला ने कहा कि मरीज को स्ट्रेचर से ले जाया गया था। आरोप बेबुनियाद हैं।

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यह घोर लापरवाही है, प्रसूता की देखरेख नहीं की गई है। इस मामले की जांच की जा रही है। कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

आनंद कुमार सिंह, एसडीएम सदर।

Posted By: Jagran

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