-निरीक्षण में मिली खामियां, नहीं दिखा पाए रिकार्ड

-पॉक्सो के तहत रह रही बालिकाओं को घर भेजा जाएगा

जागरण संवाददाता, कानपुर : सुभाष चिल्ड्रेन होम में रह रहे बच्चों की स्थिति ठीक नहीं है। वहां छोटे बच्चों के साथ दिव्यांग बच्ची खेलते हुए मिली, जिन अभिभावकों को बच्चें सौंपे गए, उनके रिकार्ड नहीं मिले। विदेशों में गोद दिए गए बच्चों की कोई सूचना भी नहीं थी। भिक्षावृत्ति के तहत लाए गए बच्चों को भी क्वारंटाइन नहीं किया गया था। गंदगी और कई अन्य खामियां भी निरीक्षण के दौरान मिली हैं। इसीलिए सुभाष चिल्ड्रेन होम को बंद करने की संस्तुति के साथ रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में प्रेसवार्ता के दौरान राज्य बाल अधिकारी संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी और सदस्य साक्षी बैजल ने यह बात कही।

उन्होंने बताया कि मंडल के जिला प्रोबेशन अधिकारियों के साथ बैठक की थी। इसमें मुख्यमंत्री की बाल सेवा योजना और स्पांसरशिप योजना की समीक्षा की गई। कोविड के दौरान जिनके माता पिता की मृत्यु हो गई, ऐसे 104 बच्चों का डाटा बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड किया गया है, जिन परिवारों में मुखिया की मौत हुई है लेकिन वह कोविड का प्रमाण पत्र नहीं दे पा रहे हैं उन्हें भी स्पांसरशिप योजना के तहत दो हजार रुपये प्रतिमाह 18 साल तक देने का प्रविधान है। उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों को आरटीई एक्ट के तहत दाखिला, श्रम योजना के लाभ, कन्या सुमंगल योजना के लाभ दिलाने के निर्देश जिला प्रोबेशन अधिकारियों को दिए गए हैं। सदस्य ने बताया कि स्वरूप नगर स्थित बालिका गृह के निरीक्षण के दौरान पॉक्सो के तहत लायी गई पीड़िताओं से बातचीत की। अधिकतर पीड़िताएं घर जाना चाहती हैं और उनके घर वाले भी रखना चाहते हैं। बाल कल्याण समिति को निर्देशित किया गया है कि ऐसे मामलों में गंभीरता से कदम उठाएं ताकि पीड़िताओं को उनके घर भेजा जा सके। सदस्य ने बताया कि स्वरूप नगर में 69 पॉक्सो एक्ट से जुड़ी पीड़िताएं रह रहीं हैं जिनमें झांसी, एटा और आगरा से लायी गई बालिकाएं हैं।

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