अनुज शुक्ल, कानपुर : लूट हो या दुष्कर्म जैसे संगीन मामले, गिरफ्त में आने के बाद भी कई अपराधी जेल की सलाखों के पीछे होने के बजाय जमानत पर शहर में घूम रहे हैं। दिए गए चंद उदाहरण तो बानगी मात्र हैं, कानूनी दांवपेच के जरिए गंभीर से गंभीर मामलों में फटाफट जमानत पा जाने वाले शातिरों की खासी संख्या है। दरअसल, यह सारा खेल कुछ ऐसे सफेदपोश दलालों का है जो अपराधी के पकड़े जाते ही सक्रिय हो जाते हैं और शहर में अपराध कम करने के लिए शातिरों की धरपकड़ के अभियान को पलीता लगाते हैं। लचर विवेचना व कानूनी दांवपेच की बारीकियों का फायदा उठाकर धोखाधड़ी, लूट, चोरी, दुष्कर्म व गैंगस्टर मामले में जमानत खड़े ही खड़े करा देते हैं। इसके लिए बाकायदा शहर में पैकेज चलता है। जमानत से लेकर थाने व जेल तक में सुविधा मुहैया करने तक का जिम्मा होता है। केस एक : चकेरी से तीन सितंबर 2017 को सुहैल अख्तर को धोखाधड़ी व बलवा जैसे संगीन आपराधिक मामलों में गिरफ्तार किया गया। उसकी अगले दिन बिना जेल जाए ही खड़े-खड़े जमानत हो गई। उसके भाई सउद के खिलाफ पुलिस कुर्की की कार्रवाई कर चुकी है। दर्ज अन्य मामलों में भी दोनों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

केस दो : रायपुरवा पुलिस ने धर्मेद्र कुमार को 19 सितंबर 2017 को घर में घुसकर लूटपाट में जेल भेजा। उसकी अगले ही दिन जमानत हो गई।

केस तीन : सचेंडी पुलिस ने 29 दिसंबर 2017 को नाबालिग को अगवा कर दुष्कर्म मामले में पास्को एक्ट में गिरफ्तार फूल मोहम्मद तीसरे दिन एक जनवरी 2018 को जमानत पर छूट गया। जनवरी से दिसंबर 2017 तक छूटे आरोपित - 175

जनवरी से मार्च 2018 तक छूटे आरोपित -99 । फर्द की कड़ी से कड़ी न मिलने से छूट रहे अपराधी

आरोपित के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद विवेचना में घटना की शुरुआत से गिरफ्तारी तक में कड़ी से कड़ी न जुड़ने का ही फायदा शातिर उठा रहे हैं। सबसे बड़ी कमी आरोपित को गिरफ्तार करने की जगह पर उसकी मौजूदगी के साथ उसके खिलाफ साक्ष्य उपलब्ध न करा पाना होता है। जेल से छूटे अपराधियों की निगरानी करेंगे चौकी प्रभारी

जेल से छूटते ही शातिरों के पीछे स्थानीय चौकी प्रभारी और बीट आरक्षी लगेंगे। इन शातिरों द्वारा शहर में कहीं भी वारदात करते या करने के बाद धरपकड़ न होने पाने पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए जेल से छूटने वाले हर शातिर का डाटा बैंक जेल चौकी में तैयार किया जा रहा है। इसका पूरा ब्यौरा स्थानीय चौकी प्रभारी को सौंपा जाएगा।

एसएसपी अखिलेश कुमार ने इस बारे में कहा कि कानून के दांवपेच का फायदा संदिग्ध से ज्यादा शातिर अपराधी भी उठा रहे हैं। पकड़े जाने के चंद दिनों बाद जेल से छूटकर दोबारा अपराध शुरू कर देते हैं। ऐसे अपराधियों पर लगाम करने से लिए गिरफ्तारी के बाद फर्द व विवेचना में गुणात्मक सुधार के लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। जेल से छूटे लोगों की निगरानी के लिए पुलिस कर्मी लगाए जाएंगे।

By Jagran