कानपुर, [गौरव दीक्षित]। प्रथम विश्वयुद्ध World War में जिस रायफल के बूते अमेरिकी सेना (US ARMY) ने दुश्मन देशों के दांत खट्टïे किए, उससे ही विकास दुबे Vikas Dubey ने बिकरू में सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों को मौत के घाट उतारा था। बिकरू कांड Bikru Case में इस्तेमाल हुई विकास दुबे के भांजे शिव तिवारी की सेमी ऑटोमेटिक स्प्रिंगफील्ड रायफल को लेकर बड़ा राजफाश हुआ है। पता चला है कि गनहाउस संचालक ने रायफल के ऑटोमेटिक फंक्शन को बिना निष्क्रिय किए ही विकास दुबे को बेच दिया था। स्पेशल टास्कफोर्स (एसटीएफ) ने जो रायफल बरामद की है, उसमें ऑटोमेटिक फंक्शन सक्रिय मिला है। अब एसटीएफ ने जिला और पुलिस प्रशासन को भेजी रिपोर्ट में गनहाउस संचालक पर कार्रवाई की संस्तुति की है।

प्रतिबंधित है स्प्रिंगफील्ड रायफल

सेमी ऑटोमेटिक स्प्रिंगफील्ड रायफल प्रतिबंधित हथियार है। लाइसेंसी हथियार के रूप में उसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। अमेरिका सेना प्रथम विश्वयुद्ध में इसी रायफल के साथ उतरी थी। आजादी के बाद भारतीय सेना भी 30.06 बोर की सेमी ऑटोमेटिक स्प्रिंगफील्ड रायफल का प्रयोग करती थी, मगर अब इसका प्रयोग नहीं होता। सेना कंडम हो चुके इन हथियारों को रिटायर होने वाले अपने अधिकारियों व जवानों को बेहद कम दामों पर बेच देती है। बेचने से पहले इनका ऑटोमेटिक फंक्शन निष्क्रिय कर दिया जाता है क्योंकि इससे यह हथियार 30.06 बोर की साधारण रायफल बनकर रह जाता है और तब इसे लाइसेंसी हथियार के रूप में रखा जा सकता है।

एसटीएफ के सीओ टीबी सिंह के मुताबिक शिव तिवारी को 30.06 बोर की रायफल का शस्त्र लाइसेंस जारी हुआ था। मगर, विकास दुबे ने अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर जो सेमी ऑटोमेटिक स्प्रिंगफील्ड रायफल खरीदी और उसका ऑटोमेटिक फंक्शन भी निष्क्रिय नहीं किया गया। बरामद रायफल से इसकी पुष्टि भी हो गई है।

मारक क्षमता के चलते नहीं टिक पाई थी पुलिस

सक्रिय स्प्रिंगफील्ड रायफल की मैग्जीन में एक बार में 10 कारतूस भरकर लगातार इन्हेंं चलाया जा सकता है। माना जा रहा है कि इसीलिए बिकरू में पुलिस टीम विकास के गुर्गों के सामने टिक नहीं सकी और दो-दो स्प्रिंगफील्ड रायफल ने पुलिस को कदम पीछे खींचने पर मजबूर कर दिया।

दीपू की रायफल को लेकर बढ़ी चिंता

शिव तिवारी के पास सक्रिय स्प्रिंगफील्ड रायफल मिलने के बाद पुलिस की चिंता दीपू दुबे की गायब रायफल को लेकर बढ़ गई है। माना जा रहा है कि वह हथियार भी सेमी ऑटोमेटिक है और गलत हाथों में पडऩे पर बिकरू कांड जैसी घटना दोहराई जा सकती है।

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