कानपुर, जेएनएन। चौबेपुर थाना अंतर्गत बिकरू गांव में में दो जुलाई की रात सीओ समेत आठ पुलिस कर्मियों की हत्या की घटना में वांछित पांच लाख का इनामी विकास दुबे कितना दुर्दांत अपराधी है, अबतक की कुछ बड़ी वारदातें इसकी गवाही देती हैैं। ये बताती हैैं कि उसने कब और किस तरह के अपराधों को अंजाम दिया। उसपर कानपुर व आसपास करीब हत्या, हत्या के प्रयास और लूट, रंगदारी वसूलने समेत कई धाराओं में 62 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। बिकरू कांड के बाद से यूपी पुलिस की 60 टीमें उसकी तलाश कर रही थीं।

विकास का गैंग डी-124

मोस्टवांटेड विकास दुबे के नाम पर पुलिस रिकार्ड में डी-124 गैंग भी दर्ज है। इस रिकार्ड के मुताबिक उसके गिरोह में वो 11 शातिर बदमाश शामिल हैं जो उसके इशारे पर जान लेने से नहीं हिचकते भले ही सामने वाला खाकीधारी हो या खादीधारी। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक 30 जून 2018 को तत्कालीन एसएसपी अखिलेश कुमार के आदेश पर विकास का गैंग पंजीकृत किया गया था। विकास के अलावा इस गैंग में 11 अन्य सदस्य हैं। इनमें सबसे खास सदस्य सुज्जापुर भीटी निवासी 52 वर्षीय विष्णुपाल सिंह उर्फ जिलेदार है। वह गांव का प्रधान भी है।

बताते हैं कि जैसे ही पुलिस का मूवमेंट बिकरू की ओर होता था तो जिलेदार के गुर्गे विकास को चौकन्ना कर देते थे। भले ही पुलिस की गाड़ी केवल गश्त के लिए आई हो। खास बात यह है कि जिलेदार को छोड़कर गिरोह के सभी सदस्यों की उम्र 30 से 40 वर्ष के आसपास है। अधिकांश बदमाश पड़ोस के गांव तकीपुर और काशीराम निवादा निवासी हैं। पुलिस के मुताबिक विकास की एक आवाज पर  पूरा गिरोह महज पांच से सात मिनट में इकट्ठा हो जाता है। 

यह हैं गिरोह के बदमाश 

  • रामनरेश नागर निवासी तकीपुर
  • मनोज (रामनरेश का भाई) निवासी तकीपुर 
  • चंद्रजीत (जिलेदार का पुत्र) निवासी काशीराम निवादा 
  • इंद्रजीत (जिलेदार का पुत्र) निवासी काशीराम निवादा 
  • संतोष कुमार यादव निवासी रिक्खीपुरवा 
  • रणवीर सिंह उर्फ बउअन निवासी तकीपुर 
  • लालाराम निवासी दिलीपी निवादा 
  • अजीत कुमार निवासी काशीराम निवादा
  • सत्यम उर्फ लुट्टन निवासी काशीराम निवादा 
  • नाहर सिंह उर्फ धर्मेंद्र सिंह निवासी तकीपुर

थाने में राज्यमंत्री की हत्या का लगा था आरोप: 2001 में भाजपा सरकार में श्रम संविदा बोर्ड के चेयरमैन संतोष शुक्ला की शिवली थाने में घुसकर हत्या की गई थी। इसमें विकास मुख्य आरोपित था। इस घटना में गवाह तो मुकरे ही, पुलिस भी मुकर गई। विकास बरी हो गया। संतोष शुक्ला और विकास दुबे में अदावत तब शुरू हुई जब 1996 के विधानसभा चुनाव में संतोष को हराकर बसपा के हरिकिशन श्रीवास्तव विजय जुलूस निकाल रहे थे और दोनों में झगड़ा हो गया था। इसमें विकास पर भी मुकदमा हुआ था।

शिवली चेयरमैन के घर किया था बम-गोली से हमला : 22 अक्टूबर, 2002 की शाम शिवली नगर पंचायत के तत्कालीन चेयरमैन लल्लन वाजपेयी के घर पर बम और गोलियों से हमला किया गया था। इसमें तीन की मौत हो गई थी। लल्लन व उनके समर्थक तेजा ङ्क्षसह गंभीर रूप से घायल हुए थे। विकास ने यह वारदात कानपुर जिला जेल में रहते हुए करवाई थी। उसे उम्रकैद की सजा हुई है। अभी हाईकोर्ट से बेल पर है। लल्लन वाजपेयी कहते हैं कि करीब 12 बम व 48 राउंड गोलियां चलाई गई थीं। मैैं किसी तरह बच गया लेकिन कुछ साथी मारे गए। विकास को गुनाहों की सजा मिलती तो आज पुलिस कर्मी शहीद नही होते। शिवली के रामबाबू यादव की हत्या के मामले में भी विकास पर जेल से साजिश रचने का मुकदमा दर्ज हुआ था।

कन्नौज में किसान की हत्या में दर्ज हुआ था पहला मुकदमा : विकास पर पहला मुकदमा वर्ष 1994 में बिल्हौर थाने में हत्यायुक्त डकैती का दर्ज हुआ था। इसमेें कन्नौज के मानीमऊ के तेजापुरवा गांव निवासी किसान सरमन की हत्या हुई थी। जमीन के विवाद मेें हुई हत्या में विकास मुख्य आरोपित था। इसमें भी गवाह मुकर गए थे।

कॉलेज के सहायक प्रबंधक की हत्या में भी हुआ नामजद : वर्ष 2000 में कानपुर देहात के शिवली थानाक्षेत्र के ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या में भी विकास नामजद हुआ था।

केबिल व्यवसायी की हत्या भी: विकास का नाम 2004 में केबल व्यवसायी दिनेश दुबे की हत्या में भी मुख्य आरोपित के तौर पर दर्ज हुआ। यह हत्या रंगदारी न देने पर हुई थी।

Posted By: Abhishek Agnihotri

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