उन्नाव, जागरण संवाददाता। दो दिन पहले मौरांवा की दुष्कर्म पीड़िता 12 वर्षीय किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया, सात माह पहले उसे तीन लोगों ने अगवा करके हवस का शिकार बनाया था। पुलिस अब आरोपित की पहचान के लिए डीएनए टेस्ट की तैयारी कर रही है। वहीं पीड़िता की मां ने भी न्याय के लिए हर तरह से लड़ाई लड़ने की बात कही है। 

क्या हुई थी घटना

मौरावां क्षेत्र के एक गांव 13 फरवरी को निवासी 12 वर्षीय किशोरी घर से पड़ोस स्थित दुकान पर शक्कर लेने गई थी। घरवालों ने पुलिस से शिकायत की थी कि दुकान पर चीनी लेने गई बेटी को गांव के तीन लोग अगवा करके कब्रिस्तान ले गए और सामूहिक दुष्कर्म किया। राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने भी घटना का संज्ञान लिया था और पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज करके आरोपित अरुण, सतीश व एक रिश्तेदार को गिरफ्तार करके जेल भेजा था।

पांच माह बाद गर्भवती होने की जानकारी हुई

मां को पीड़िता के पांच माह बाद गर्भवती होने की जानकारी हुई थी। इसपर पीड़िता के प्रसव को लेकर इंतजामात के लिए जिला अस्पताल को निर्देशित किया गया था। सात माह बाद बीते मंगलवार की सुबह मां पीड़िता को सुबह 7:15 बजे सखी वन स्टाप सेंटर की महिला सिपाही सरिता के साथ लेकर जिला महिला अस्पताल पहुंची।

डॉक्टरों ने उसे भर्ती करके प्रसव कराया और दोपहर 12:09 बजे किशोरी ने बच्चे को जन्म दिया। प्रीमेच्योर बच्चा होने की वजह से उसे सिक न्यूबार्न केयर यूनिट (एसएनसीयू ) में विशेष निगरानी में रखा गया। बाद में उसे कानपुर एलएलआर अस्पताल रेफर कर दिया गया।

मां बोली- इंसाफ के लिए लड़ाई, अब पुलिस कराएगी डीएनए टेस्ट

दुष्कर्म पीड़ित बालिका ने बच्चे को खुद पालने की बात कही है, वहीं उनकी मां ने कहा है कि इंसाफ के लिए न्यायालय में लड़ाई लड़ेगी। एसपी दिनेश त्रिपाठी ने बताया कि बताया कि मुकदमा ट्रायल पर है और आरोपित जेल में हैं। अब बालिका एक अन्य का नाम लेकर उसे मुख्य आरोपित बता रही है। 27 सितंबर को पेशी तारीख है। पीड़िता की मां के प्रार्थना पत्र को कोर्ट में पेशकर डीएनए टेस्ट कराने की अनुमति ली जाएगी।

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Edited By: Abhishek Agnihotri