जागरण संवाददाता, कानपुर : नया वर्ष यूसीसी बैंक के 25,152 खाताधारकों के लिए सौगात लेकर आ रहा है। बैंक बंदी के बाद जमा धनराशि वापस पाने के लिए ग्राहक अरसे से इंतजार कर रहे थे। डिपाजिट इंश्योरेंस क्रेडिट गारंटी कार्पोरेशन (डीआइसीजीसी) ने खाताधारकों को जनवरी 2019 में पैसा वापस करने की मंजूरी दी है। फिलहाल उन्हें एक लाख रुपये तक ही वापस मिल सकेंगे।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआइ) ने यूसीसी बैंक में 68 करोड़ रुपये का घोटाला होने के बाद इसे बंद कर दिया था। इसके साथ ही खाताधारकों की खून-पसीने की कमाई के करोड़ों रुपये फंस गए थे। आरबीआइ ने छह माह पहले बैंक का लाइसेंस भी निरस्त कर दिया। ऐसे में ग्राहकों को एक लाख रुपये मिलने की उम्मीद जगी थी। बैंक में ग्राहकों की जमा धनराशि में एक लाख रुपये तक वापस करने की जिम्मेदारी डीआइसीजीसी की होती है। बैंक बंदी के बाद वर्ष 2015 में ग्राहकों के लिए फार्म आए थे, ताकि वह अपनी जमा धनराशि में एक लाख रुपये वापस पा सकें। इस बीच नौ करोड़ रुपये की एक इंट्री पर आपत्ति से प्रक्रिया अटक गई। पहले चरण में एक लाख रुपये तक का भुगतान होगा। दूसरे चरण में बैंक की संपत्तियां बेचकर शेष ग्राहकों को भुगतान किया जाएगा।

लखनऊ में आरबीआइ अफसरों के साथ बैंक के लिक्विडेटर का कार्य देख रहे अपर जिला सहकारिता अधिकारी संजय तिवारी, डीआइसीजीसी के उप महाप्रबंधक दीपक नारंग की बैठक हुई। आरबीआइ अधिकारियों के मामला उठाने पर दीपक नारंग ने ग्राहकों को जनवरी से भुगतान शुरू करने का भरोसा दिलाया है।

बैंक के खातों में एक करोड़ रुपये

यूसीसी बैंक के खातों में एक करोड़ रुपये हैं, जबकि नौ करोड़ रुपये आरबीआइ के पास सिक्योरिटी मनी के रूप में जमा हैं। इसके अलावा नौ-दस करोड़ रुपये की संपत्तिया हैं।

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'' डीआइसीजीसी जनवरी से ग्राहकों को भुगतान करेगा। इससे धन वापसी का संशय दूर हो गया है। जिन ग्राहकों का एक लाख रुपये तक जमा है, उन्हें पूरी रकम मिल जाएगी। जिनका एक लाख रुपये से अधिक जमा है, उन्हें अधिकतम एक लाख रुपये ही मिलेगा। बची धनराशि लौटाने के लिए आगे कार्रवाई की जाएगी।

- संजय तिवारी, लिक्विडेटर, यूसीसी बैंक

Posted By: Jagran

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