कानपुर (आलोक शर्मा)। दीपावली खुशियों का त्योहार है, लेकिन यह खुशियां किसी को नई जिंदगी के रूप में मिले तो कहना ही क्या। जनपद न्यायाधीश आरके गौतम की मुहर के बाद शहर के दो अनाथ बच्चों को नया घरौंदा मिला और जिम्मेदारी उठाने वाले नए मम्मी पापा भी। हालांकि इस कड़ी में छह और मासूम शामिल हैं, जिसमें तीन बेटियों को भी गोद लेने के लिए अभिभावकों ने रुचि दिखाई है। फिलहाल इन छह बच्चों के दत्तक ग्रहण पर अभी अंतिम अधिकारिक मुहर नहीं लगी है लेकिन इन बच्चों ने अपने नए परिवार में दीपावली मनाई। आप भी किसी अनाथ मासूम के जीवन में खुशियां भरना चाहते हैं तो कुछ नियमों और प्रक्रिया का पालन करके उनके मम्मी-पापा बन सकते हैं।

इनकी गोद प्रक्रिया हुई पूरी

-एक दिन का ईशू (बदला हुआ नाम) सितंबर 2017 को सुभाष चिल्ड्रेन सोसाइटी को गंभीर हालत में मिला था। कारा में रजिस्ट्रेशन होने के बाद उसे अप्रैल 2018 को हरियाणा में एक परिवार को गोद दिया गया है।

-रीशू (परिवर्तित नाम) की उम्र दो वर्ष है। उसे बेंगलुरु के एक दंपती को मई 2018 में गोद दिया गया था। विशेष दत्तक ग्रहण इकाई के समन्वयक विनय कुमार ओझा के मुताबिक नए परिवार में वह बहुत खुश है।

तीन बेटियों को भी मिला नया घर

बेटी बचाओ और बेटी पढ़ाओ का असर समाज की सोच में भी दिखने लगा है। यही कारण है कि विशेष दत्तक ग्रहण इकाई से तीन बेटियों को भी गोद लेने वाले आगे आए। इन बेटियों को अपना नया घर भी मिल चुका है, लेकिन अभी अंतिम दत्तक ग्रहण प्रक्रिया में मुहर लगना शेष है।

गोद लेना है तो 'कारा' में करें आवेदन

बच्चों को गोद लेने के लिए भारत सरकार की केंद्रीय दत्तक ग्रहण प्राधिकरण 'कारा' में दंपती आवेदन कर सकते हैं। यह आवेदन ऑनलाइन होता है जो www.cara.nic.in में किया जाता है। आवेदन प्रक्रिया समझने के लिए जिले की विशेष दत्तक ग्रहण इकाई में भी संपर्क कर सकते हैं।

शादी के दो वर्ष बाद ही बच्चे मिलेंगे गोद

बच्चे गोद चाहिए तो शादी के दो वर्ष पूर्ण होना बेहद जरूरी है। नियम के मुताबिक आवेदक की उम्र भी 25 वर्ष से अधिक होनी चाहिए। कारा में पंजीकरण कराने के लिए कुछ दस्तावेज जैसे शादी का प्रमाण पत्र, पैन कार्ड, स्थाई व अस्थाई निवास प्रमाण पत्र, स्वास्थ्य प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, मोबाइल नंबर, ई-मेल आइडी होना चाहिए। पंजीकरण कराने के बाद दंपती को वेटिंग नंबर मिलता है। नंबर आने पर बच्चा देश की किसी भी विशेष दत्तक ग्रहण इकाई से दिया जा सकता है।

अनाथ बच्चों को स्वतंत्र घोषित कराने की प्रक्रिया

विशेष दत्तक ग्रहण इकाई को जो बच्चे लावारिश मिलते हैं उन्हें स्वतंत्र (गोद देने के लिए) घोषित कराना होता है। इसके लिए कई चरण पूर्ण करने होते हैं।

-कारा के बेवपोर्टल पर संस्था में प्रवेश के साथ 72 घंटे के भीतर बच्चे का फोटो और विवरण अपलोड किया जाता है।

-किशोर न्याय (बालकों की देखरेख व संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 38 के तहत दो वर्ष तक के बच्चों को 60 दिन में और इसके अधिक आयु के बच्चों को 120 दिन के भीतर बाल कल्याण समिति गोद देने के लिए स्वतंत्र घोषित करती है।

-कारा दंपती के प्रमाण पत्रों व दस्तावेजों का अवलोकन करती है और पोर्टल पर पंजीकृत माता-पिता का मिलान बच्चे के साथ किया जाता है और स्वीकृति दी जाती है।

-भावी दत्तक माता-पिता द्वारा बालक को स्वीकार करने के उपरांत संस्था द्वारा दत्तक ग्रहण समिति की बैठक की जाती है। जिला प्रोबेशन अधिकारी, चिकित्सक, अधीक्षिका/सामाजिक कार्यकर्ता और संस्था के प्रतिनिधि भावी दत्तक माता पिता के समस्त दस्तावेजों का अवलोकन बच्चे को पूर्व पालन पोषण के लिए उन्हें सौंप दिया जाता है।

-इस पूरी प्रक्रिया पर जनपद न्यायाधीश के यहां विशेष दत्तक ग्रहण इकाई के सदस्य मामला दाखिल करते हैं जिस पर पूरी सुनवाई के बाद जनपद न्यायाधीश अंतिम मुहर लगाते हैं।

Posted By: Abhishek

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