कानपुर [बृजेश दुबे]।  सिक्कों की खनखनाती दुनिया में अब नए मूल्य वर्ग का सिक्का जुडऩे जा रहा है। यह सिक्का न केवल डिजाइन में अलग होगा बल्कि थीम भी आधुनिक होगी। यह द्विधात्विक (दो धातुओं से मिलकर बना) होगा। इसकी डिजाइन पर काम शुरू हो गया है। माना जा रहा कि दिसंबर, 2018 तक यह सिक्का बाजार में लांच हो जाएगा। हालांकि इसके साथ ही सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक के सामने सिक्का प्रबंधन की पुख्ता योजना बनाने की भी चुनौती होगी। अभी देश की अर्थव्यवस्था में तकरीबन 26 हजार करोड़ रुपये के सिक्के चलन में हैं लेकिन, जमा करने की व्यवस्था ठीक न होने से बैंक ना-नुकुर करते हैं।

दस रुपये के नए नोटों की छपाई सीमित है और बीस रुपये के नोट की छपाई बंद है। बाजार में दस और बीस रुपये के पुराने नोट अधिक हैं। अर्थव्यवस्था में इस समय तकरीबन 80 हजार करोड़ रुपये कीमत के पांच से बीस रुपये के मूल्य वर्ग के 57 अरब नोट हैं। आरबीआइ के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार देश भर में इस समय 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के दस और बीस रुपये के स्वॉयल नोट हैं। चूंकि क्लीन नोट पालिसी के तहत इन्हें आरबीआइ के पास वापस आना है, इसलिए छोटे नोट की भरपाई भी करनी होगी।

इतनी बड़ी राशि की भरपाई के लिए आरबीआइ अगर उसी मूल्य वर्ग के नोट छापती है तो उसे करीब 40 अरब नोट छापने होंगे। इसमें करीब सात-आठ हजार करोड़ रुपये का खर्च आएगा। नोटों की उम्र अधिकतम पांच साल मानी जाती है। ऐसे में वह फिर से स्वॉयल्ड की श्रेणी में आएंगे, जबकि सिक्का होगा तो वह लंबे समय तक चलेगा। चूंकि दस रुपये का सिक्का बाजार में बहुतायत में है, इसलिए आरबीआइ ने बीस रुपये का सिक्का निकालने का निर्णय लिया गया है।

छोटे नोटों का प्रचलन (31 मार्च 2017 तक)

दो और पांच रुपये : 4500 करोड़ रुपये

दस रुपये : 36900 करोड़ रुपये (दस रुपये के नए नोट शामिल नहीं)

बीस रुपये : 40600 करोड़ रुपये

इनमें से कोई एक थीम

डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तीकरण, रक्षा क्षेत्र में विकास, स्वच्छ भारत

पहली बार होगा लीगल टेंडर

बीस रुपये का सिक्का लाने के लिए भारत सरकार इसे लीगल टेंडर बनाने की तैयारी कर रही है। अभी तक बीस रुपये के सिक्के स्मारक सिक्के के रूप में ही जारी हुए हैं। लीगल टेंडर की अनुमति मिलने के बाद इसे जारी किया जाएगा। ये सिक्के पहली बार चलन में होंगे। 

Posted By: Ashish Mishra