जागरण संवाददाता, कानपुर : छावनी परिषद आर्थिक संकट में है। आय के प्रमुख स्त्रोतों से हो रही बेहद कम वसूली के चलते परिषद के पास अब केवल एक महीने के खर्च का धन शेष बचा है। अगर ऐसे ही हालात रहे तो नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही छावनी परिषद को आर्थिक समस्याओं से दो चार होना पड़ेगा।

छावनी परिषद को अपने कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सफाई के ठेकों के लिए हर माह करीब तीन करोड़ रुपये की आवश्यकता होती है। फरवरी महीने में परिषद के खाते में 2.90 करोड़ रुपये ही शेष बचे हैं। इसका मतलब यह है कि मार्च के वेतन के भुगतान के बाद छावनी के पास कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ने वाले हैं। हालांकि परिषद के पास एक विकल्प शेष है कि वह इस समस्या से निपटने के लिए सात करोड़ की एफडी को तोड़े।

उपाध्यक्ष और सीईओ ने किया विचार विमर्श

परिषद की आर्थिक समस्या को लेकर मंगलवार को उपाध्यक्ष लखन ओमर और सीईओ हरेंद्र सिंह ने विचार विमर्श किया। सीईओ और उपाध्यक्ष दोनों ने परिषद की इस स्थिति के लिए उन सरकारी विभागों को जिम्मेदार ठहराया, जिन्होंने सर्विस टैक्स का पैसा नहीं चुकाया है।

कमाई का 95 फीसद सर्विस टैक्स से छावनी परिषद की आय के चार प्रमुख स्त्रोत हैं। परिषद छावनी क्षेत्र में स्थित विभिन्न सरकारी विभागों से सर्विस टैक्स वसूल करता है, जिससे उसे हर माह करीब 30 करोड़ रुपये की आय होनी चाहिए, लेकिन कुछ एक विभागों को छोड़कर शेष सन् 1982 से चार्ज नहीं दे रहे हैं। केवल एयरफोर्स वह बड़ा विभाग है, जो समय पर परिषद को लगभग नौ करोड़ रुपये का वार्षिक भुगतान करता है। इसके अलावा परिषद करीब 1.5 करोड़ रुपये व्यवसायिक वाहनों के प्रवेश शुल्क, 1.5 करोड़ रुपये प्रॉपर्टी टैक्स और 6 करोड़ रुपये केंद्र से ग्रांट के रूप में मिलते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में मिली है जीत

सर्विस टैक्स के मामले में छावनी परिषद ने रेलवे से सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ा और जीत हासिल की। बावजूद इसके रेलवे व डीआरडीओ के कोई विभाग अभी भी पैसे देने को तैयार नहीं है।

इन विभागों पर है बकाया

रेलवे : 54 करोड़ रुपये (25 करोड़ देने पर बनी है सहमति)

डीआरडीओ : 41 करोड़ रुपये (भुगतान पर मौखिक में बन चुकी है सहमति)

आर्डिनेंस : 100 करोड़ रुपये

इसके अलावा लगभग एक दर्जन विभाग जिला प्रशासन, सिंचाई विभाग, पुलिस विभाग, डाक आदि का 30 करोड़ रुपया बकाया है।

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छावनी परिषद खुद कमाने और खाने वाली संस्था है। कमाई का 95 फीसद हिस्सा सर्विस टैक्स सेआता है। इसकी वसूली कमजोर होने से अर्थिक संकट पैदा हुआ है।

हरेंद्र सिंह, सीईओ

सीईओ के साथ इस मुद्दे पर वार्ता हुई है। खर्च के साथ ही नए वित्तीय वर्ष में बजट की दस फीसद राशि भी खाते में रखनी है। सर्विस चार्ज की कम वसूली पर प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है।

लखन ओमर, उपाध्यक्ष छावनी परिषद

Posted By: Jagran