जासं, कानपुर : एलएलआर अस्पताल में गंभीर मरीजों के बेहतर इलाज के लिए सालिगराम कल्लूमल ट्रस्ट ने ट्रांसपोर्टेबल वेंटिलेटर दिया। ट्रस्ट के पदाधिकारी प्रो. एसएन अग्रवाल ने जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य को वेंटिलेटर देते हुए कहा कि जब उनको पूर्व विभागाध्यक्ष आरके बंसल से वेंटिलेटर के लाभ और मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने की जानकारी हुई तो पारिवारिक ट्रस्ट के सहयोग से इसे पूरा किया।

प्राचार्य डा. आरबी कमल ने कहा कि संक्रमण से जंग में संसाधन की अहम भूमिका होती है। संसाधन होने पर गंभीर मामलों में भी डाक्टरों को सफलता मिल जाती है। संक्रमण के दौर में ट्रांसपोर्टेबल वेंटिलेटर गंभीर मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। इसकी मदद से मरीजों को आसानी से एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने में आसानी होगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही मेडिकल कॉलेज में एमआरआइ और सीटी स्कैन की शुरुआत की जाएगी। पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. आरके बंसल ने कहा कि कोरोना की चपेट में आए बेटे के इलाज के समय इसकी कमी महसूस हुई। मेडिसिन की विभागाध्यक्ष डा. रिचा गिरी, डा. आनंद कुमार, प्रो. यशवंत राव, प्रो. अनिल वर्मा, डा. प्रेम सिंह, प्रो. सौरभ अग्रवाल, डा. इशिता, रचित, शैलेश व अजीत रहे। -----------

नियमित रक्तदान से नहीं होती बीपी-कोलेस्ट्राल की समस्या

जागरण संवाददाता, कानपुर: कोरोना महामारी के चलते सरकारी व निजी अस्पतालों के ब्लड बैंक खाली हैं। जरूरतमंद खून के लिए भटक रहे हैं। ऐसे में रक्तदान की महत्ता और बढ़ गई है। इसे ध्यान में रखते हुए विश्व स्वैच्छिक रक्तदान दिवस (14 जून) पर दैनिक जागरण और जिला रेडक्रास सोसाइटी के सहयोग से जवाहर नगर स्थित ओंकारेश्वर सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कालेज में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर लगाया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित रक्तदान से ब्लड प्रेशर (बीपी) और कोलेस्ट्राल की समस्या नहीं होती है। आएं रक्तदान का संकल्प लें, 14 जून को शिविर में रक्तदान कर जरूरतमंदों की जान बचाने में सहभागी बनें।

जिला रेडक्रास सोसाइटी के अवैतनिक सचिव आरके सफ्फड़ ने रक्तदान के फायदे बताते हुए आमजन से रक्तदान की अपील की है। उनका कहना है कि 18-65 वर्ष की उम्र के बीच का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति रक्त दान कर सकता है। ऐसे व्यक्ति का वजन 45 किलो से कम न हो और खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 होनी चाहिए। उनका कहना है कि नियमित रक्तदान करने वालों को गंभीर बीमारियां कम होती हैं।

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रक्तदानियों के आगे कोरोना नतमस्तक

नियमित अंतराल पर रक्तदान करने वाले रक्तदानियों के आगे कोरोना भी नतमस्तक हो गया। पहले तो उन्हें कोरोना का संक्रमण नहीं हुआ। अगर कोरोना की चपेट में आए तो भी गंभीर असर नहीं दिखाई पड़ा। नियमित रक्तदान से शरीर में ताजा रक्त बना रहता है। जो हमारे शरीर की कोशिकाओं को मजबूती प्रदान करता है।

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रक्तदान कर स्वजनों को श्रद्धांजलि

रेडक्रास के आरके सफ्फड़ का कहना है कि रक्त दान कर जरूरतमंद की जान बचाकर अपने स्वजन को सच्ची श्रद्धांजलि दे सकते हैं। शिविर में रक्तदान करने पर प्रशंसा पत्र एवं डोनर कार्ड मिलता है, उसे दिखाकर तीन माह तक खून ले सकते हैं।

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यह भी जानें

- रक्तदान करने से किसी प्रकार की कमजोरी नहीं आती।

- रक्तदान आपके ब्रेन को और भी मजबूत करता है।

- एक यूनिट रक्त से चार व्यक्तियों की बचा सकते जान।

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