कानपुर, जेएनएन। कानपुर और अकबरपुर संसदीय सीट दोनों ही भाजपा व कांग्र्रेस दोनों दलों के लिए खासी महत्वपूर्ण हैं। 2009 के लोकसभा चुनाव में दोनों सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी, लेकिन 2014 में भाजपा ने बाजी पलट दोनों सीटें छीन ली थीं। गुरुवार को यह जानना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपनी जीत दोहराएगी या कांग्रेस वापसी करेगी।

परिसीमन के बाद 2009 के चुनाव में कानपुर संसदीय सीट से कांग्र्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल लगातार तीसरी बार चुनाव जीतकर केंद्रीय मंत्री बने थे। 2014 में भाजपा ने डॉ. मुरली मनोहर जोशी को कानपुर से टिकट दिया और कांग्रेस से यह सीट छीन ली। अब इस चुनाव में डॉ. जोशी मैदान में नहीं हैं लेकिन श्रीप्रकाश जायसवाल एक बार फिर कांग्र्रेस प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं और चौथी बार जीत की आस लगाए हैं। भाजपा की ओर से प्रदेश सरकार में लघु उद्योग मंत्री सत्यदेव पचौरी मैदान में है।

दोनों का मुकाबला 15 वर्ष पहले भी हो चुका है। उस समय 2004 में श्रीप्रकाश जायसवाल ने सत्यदेव पचौरी को पराजित कर दिया था। इस हिसाब से यह मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। सत्यदेव पचौरी अपनी हार का बदला ले सकते हैं तो श्रीप्रकाश जायसवाल एसएम बनर्जी के बाद चौथी बार जीतने वाले दूसरे सांसद बन सकते हैं। सपा प्रत्याशी रामकुमार पर भी दबाव होगा कि क्या वह कानपुर की सीट पर पहली बार पिता के बाद पुत्र की जीत का रिकार्ड बना सकेंगे। उनके पिता मनोहर लाल ने 1977 में जीत हासिल की थी।

दूसरी ओर अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी देवेंद्र सिंह भोले पर अपनी सीट बचाने के साथ पिछली बार की तरह बड़ी जीत हासिल करने का दबाव है। कांग्र्रेस प्रत्याशी और 2009 में चुनाव जीत कर सांसद बने राजाराम पाल पर अपनी खोई सीट हासिल करने का दबाव है। पार्टी नेताओं और समर्थकों की धड़कनें तेज हो चुकी हैं। मतगणना की एक-एक टेबल के लिए निर्देश हो रहे हैं। गठबंधन की प्रत्याशी निशा सचान के समर्थक भी जीत के प्रति आश्वस्त नजर आ रहे हैं।  

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Posted By: Abhishek

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