कानपुर, [शशांक शेखर भारद्वाज]। प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सरकारी व निजी अस्पतालों में मरीजों की जानकारी के लिए मशक्कत नहीं करनी होगी। बस अंगूठा लगाते या आधार नंबर बताते ही चंद सेकेंड में बीमारी, जांच, दवा और इलाज की पूरी जानकारी मिल जाएगी। यह संभव होगा हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) की नई डिवाइस से। इसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय के सहयोग से तैयार किया जा रहा है।

एक बार मरीज का डाटा अपलोड होने के बाद सामने आ जाएगा पूरा इतिहास

एचबीटीयू को यह प्रोजेक्ट भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आइआइटी) कानपुर की ओर से मिला है। इलेक्ट्रोनिक्स विभाग के प्रो. कृष्ण राज के नेतृत्व में छात्र इस पर काम कर रहे हैं। डिवाइस बनकर तैयार भी हो चुकी है। अब इसमें सॉफ्टवेयर अपलोड किए जा रहे हैं। प्रो. कृष्ण राज के मुताबिक यह डिवाइस आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस पर काम करेगी। इसका सारा डाटा इंटरनेट पर अपलोड होगा। इसकी सहायता से रोगियों की डिटेल लिखने की जरूरत नहीं होगी। केवल कैम स्कैनर का इस्तेमाल किया जाएगा। इसी के माध्यम से रोगी का पर्चा, जांच रिपोर्ट, एक्स-रे, अल्ट्रा साउंड की रिपोर्ट स्कैन की जाएगी। एक बार मरीज का डाटा अपलोड होने के बाद कहीं से भी इसे देखा जा सकेगा। इसके लिए मरीज को सिर्फ अंगूठा लगाने, आधार नंबर बताने या फिर पर्चा स्कैन कराने की जरूरत होगी।

सात लाख का प्रोजेक्ट

एमएचआरडी की ओर से सात लाख रुपये का प्रोजेक्ट है। इसकी आधी राशि संस्थान को मिल गई है। शोध को पेटेंट भी कराया जाएगा। बाजार में इसकी अनुमानित कीमत 3500 से 4000 होगी।

आंकड़े जुटाने में आएगी काम

डिवाइस की सहायता से यह पता भी लगाया जा सकेगा कि किस ब्लॉक और मोहल्ले में कौन सी बीमारी से पीडि़त अधिक लोग हैं। आंकड़े जुटाने से इलाज में सहूलियत मिलेगी।

सेट टॉप बॉक्स का आकर

डिवाइस का आकार टीवी के सेट टॉप बॉक्स के बराबर है। इसमें अंगूठा लगाने के लिए स्क्रीन भी लगी रहेगी।

चेहरा पहचानने की तकनीक

डिवाइस में चेहरा पहचानने वाला सॉफ्टवेयर अपलोड किए जाने की भी योजना है। मसलन एक बार रोगी की फोटो अपलोड हो जाएगी। दोबारा दिखाने के लिए सिर्फ उसकी फोटो लेते ही मरीज का पूरा इतिहास पता चल जाएगा।

इनका ये है कहना

डिवाइस की बदौलत अंगूठे के निशान और आधार नंबर से रोगियों के इलाज की पूरी डिटेल सामने आ जाएगी। ऐसे में फाइल खोने पर भी पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा।

-प्रो. कृष्ण राज, एचओडी, इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग एचबीटीयू  

Posted By: Abhishek

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