इटावा, जेएनएन। बलरई क्षेत्र में यमुना नदी के तट पर मरी हुईं हजारों मछलियां मिली हैं, जिससे ग्रामीणों में चिंता बनी हुई है। जीव विशेषज्ञ मछलियों की मौत के पीछे बाढ़ से सिल्ट बढऩे और गंदी पानी की वजह से आक्सीजन कम होने को कारण मान रहे हैं। हालांकि अभी तक प्रशासन ने खारजा झाल में नदी के पानी में उतरा रही मरी मछलियों को हटवाने का काम शुरू नहीं कराया है।

खारजा झाल में यमुना के पानी के साथ गईं हजारों मछलियां मरी पड़ी हैं। जानकार प्रदूषित पानी की वजह से मछलियों की मरने की बात कह रहे हैं। बलरई क्षेत्र के घुरहा जाखन के समीप ग्रामीणों ने यमुना किनारे खारजा झाल में मरी मछलियों को देखा तो वे चिंतित हो उठे। वे प्रदूषित पानी की वजह से मछलियों के मरने और वहां से बहकर झाल में आने की बात कर रहे हैं। सोसायटी फार नेचर कन्जर्वेशन के सचिव व पर्यावरणविद् डा. राजीव चौहान ने बताया कि जब नदी में बाढ़ आती है तो इसके साथ सिल्ट आती है। इसके कारण मछलियों को दिखना बंद हो जाता है और उनके श्वसन तंत्र पर गहरा असर पड़ता है, जिसके कारण उनकी मौत हो जाती है। उन्हें गंदे पानी में आक्सीजन भी कम मिलती है। उपजिलाधिकारी नंद प्रकाश मौर्या ने बताया कि मछलियों के मरने की सूचना आई है। इस संबंध में संबंधित विभाग को सूचित कर जांच कराई जाएगी।

यमुना का जलस्तर 18 सेमी बढ़ा : बारिश के कारण यमुना का जलस्तर पिछले 24 घंटे में 18 सेंटीमीटर बढ़ गया है। यमुना नदी कार्यस्थल प्रभारी अंचल वर्मा ने बताया कि सोमवार को यमुना का जलस्तर 116.41 मीटर पर था जो मंगलवार को दोपहर तक 116.59 मीटर हो गया। उन्होंने बताया कि मंगलवार को दोपहर बाद जलस्तर स्थिर हो गया है। यमुना का चेतावनी प्वाइंट 120.92 मीटर व खतरे का निशान 121.92 मीटर है।

Edited By: Abhishek Agnihotri