फर्रुखाबाद, जेएनएन। वर्ष 1997 में कन्या भ्रूण हत्या का विरोध और बेटी बचाने का संदेश देती फिल्म निर्माता-निर्देशक महेश भट्ट की फिल्म 'तमन्ना' रूपहले पर्दे पर दकियानूसी सोच के समाज का आइना बनकर आई थी। कैसे कचरे के ढेर में मिली एक बच्ची को किन्नर अपना लेता है और पालन-पोषण करता है। कुछ बदलाव के साथ ही सही, ऐसी ही एक कहानी असल जिंदगी में जिले में देखने को मिली। जहां किन्नर अंजली एक मजबूर मां से उसकी नवजात बेटी गोद लेती है जो उसकी जिंदगी की परी बन जाती है।

दुनिया के सामने बनी मिसाल

सेनापति क्षेत्र की रहने वाली किन्नर अंजली नवमी पर नौ माह की परी को लेकर शीतला मंदिर बढ़पुर में मुंडन संस्कार के लिए पहुंची तो उसकी अद्भुत मिसाल दुनिया के सामने आई। जब किन्नर की बेटी का धूमधाम से मुंडन संस्कार हुआ तो देखने वालों की भीड़ जुट गई। अंजली की तमन्ना अब यही है कि वह परी का भविष्य सजाए।

इस तरह गोद में आई एक परी

किन्नर अंजली ने बताया कि वह मुरादाबाद गई थी, वहां पर एक महिला ने बेटी को जन्म दिया। सातवीं बेटी होने पर महिला को तरह-तरह के ताने सुनने पड़े। इस पर अंजली ने नन्ही बच्ची को गोद ले लिया। अंजली का कहना है कि वह अपनी बेटी की अच्छे से परवरिश कर उसे खूब पढ़ाएगी-लिखाएगी। उसने कहा कि समाज में आज भी ऐसे लोग हैं, जो बेटियों को श्राप समझते हैं। ऐसे लोगों को अपनी दूषित मानसिकता बदलनी होगी।

नवमी पर कराया मुंडन संस्कार

नवरात्र की नवमी पर शीतला मंदिर में अंजली ने बच्ची का मुंडन संस्कार कराया, जहां उसके साथी किन्नर भी थे। पहले तो लोगों ने समझा कि किन्नर नेग लेने आए होंगे, लेकिन जब उन्हें पता चला कि किन्नर गोद ली बेटी का मुंडन संस्कार करवा रहे हैं तो भीड़ लग गई। किन्नरों ने बधाई गीतों पर जमकर नृत्य भी किया। मुंडन संस्कार के बाद किन्नर ने हलवा-चना का प्रसाद बंटवाया गया।

Posted By: Abhishek

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