प्रदीप तिवारी, बिठूर (कानपुर) : ये हैं सिंहपुर गांव के पुनीत द्विवेदी। वैसे तो ये स्नातक तक पढ़ाई करने के बाद एलआइसी एजेंट के रूप में कार्य कर रहे हैं। ये तो हुई खुद को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनने की बात पर इनका दूसरा मकसद इससे भी बड़ा है। उनका सपना है कि गरीबों के बच्चे भी पढ़ लिखकर कुछ बनें और देश को अपना योगदान दें। यही वजह है कि वह बिल्डरों के यहां काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने में जुटे हुए हैं। स्कूल न जाने वाले इन बच्चों को कापी, किताब भी उपलब्ध कराते हैं। यह सब कुछ उन्होंने सीखा है अपनी मां अनीता द्विवेदी से।

अनीता स्वयंसेवी संस्था की संचालिका हैं। उन्हें समाजसेवा में लगा देख पुनीत भी इस कार्य में जुट गए। एक साल से वह बहुमंजिली इमारतों के निर्माण में लगे मजदूरों के बच्चों को निर्माण स्थल पर ही जाकर पढ़ाते हैं। झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश आदि प्रांतों से आए ये मजदूर अपने बच्चों का दाखिला किसी स्कूल में नहीं करा पाते, क्योंकि वे अलग- अलग शहरों में घूमकर पेट पालते हैं। उनके बच्चे भी पढ़ लिख सकें और इन मजदूरों के घरों में भी शिक्षा का उजियारा फैले, इसलिए पुनीत ने उन्हें पढ़ाने का निर्णय लिया। वह सुबह और शाम को एक-एक घंटे गांव के पास हो रहे निर्माण स्थल पर पहुंचकर पढ़ाते हैं। वह बच्चों व उनके परिजनों को स्वच्छता के प्रति जागरूक भी करते हैं ताकि वे संक्रामक बीमारियों से दूर रहें। अब तक वह तीन सौ से अधिक बच्चों को पढ़ा चुके हैं। फिलहाल विभिन्न जगहों पर 50 बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जब वह पहली बार इन बच्चों के अभिभावकों से मिले थे तो उन्होंने पढ़ाने से मना कर दिया। कई बार मनौव्वल के बाद ये मजदूर मान गए और उन्होंने बच्चों को उनके पास पढ़ने के लिए भेजना शुरू कर दिया। बच्चों का मन पढ़ाई में लगे इसलिए वह विभिन्न त्योहारों पर मिठाई का वितरण भी करते हैं।

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