जागरण संवाददाता, कानपुर: निर्माण कार्य में अनियमितता, जलभराव के कारण जिले की ज्यादातर सड़कें टूट गई हैं। शहर में तमाम ऐसी सड़कें हैं जिन्हें देखकर यह सोचना पड़ता है कि सड़क पर गड्ढा है या गड्ढे में सड़क। ये गड्ढे सिर्फ हादसे का कारण ही नहीं बन रहे हैं बल्कि इनकी वजह से उड़ने वाली धूल से प्रदूषण फैल रहा है।

लोक निर्माण विभाग की 1300 सौ से अधिक सड़कें टूटी हुई हैं। नगर निगम की 172 सड़को का पैचवर्क होना है। नगर निगम ने कुछ सड़कों पर गड्ढे भरे भी हैं, लेकिन सड़कों के पैचवर्क में अभी तेजी नहीं आ पाई है। अब तो बरसात भी खत्म हो गई है। जीटी रोड की बात करें तो रामादेवी से आइआइटी तक एनएच पीडब्ल्यूडी को बनाना है, लेकिन सिर्फ रावतपुर के पास ही गढ्डे भरे गए हैं। इसी तरह पालीटेक्निक चौराहा से चिड़ियाघर होते हुए गंगा बैराज जाने वाली सड़क पर भी कई जगहों पर गढ्डे हैं। पनकी से रामादेवी तक हाइवे की सर्विस लेन पर बड़े-बड़े गड्ढे हैं। आर्यनगर, स्वरूप नगर जैसे पॉश इलाके में भी सड़कें टूटी हुई हैं। मालरोड से बड़ा चौराहा, परेड, चुन्नीगंज होते हुए फजलगंज से बर्रा बाईपास जाने वाली सड़क पर भी गढ्डे हैं। बाबूपुरवा थाना से यशोदा नगर, मार्बल मार्केट से अलंकार गेस्ट हाउस, परेड चौराहा से चर्च रोड, कोयला नगर से पुलिस चौकी से गणेशपुर मोड़, चौबे चौराहा से हरिहर धाम मेन रोड तक की सड़क भी टूट गई है। ट्रांसपोर्ट नगर से बाकरगंज जाने वाली सड़क पर तो पैदल चलना मुश्किल है। आए दिन पैदल चलने वाले यात्री भी इस पर गिरकर चुटहिल होते हैं। इतना ही नहीं पालीटेक्निक चौराहा के पास वाणिज्यकर कार्यालय जाने वाली सड़क हो या जीटी रोड से मकड़ीखेड़ा जाने वाली सड़क सब पर गढ्डे ही गड्ढे हैं। 13 सौ सड़कें पैचवर्क करेगा लोनिवि

लोक निर्माण विभाग की 13 सौ सड़कें टूटी हैं। इनके पैचवर्क पर 12.94 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके साथ ही विशेष मरम्मत के मद में 36 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

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सड़कों को गढ्डा मुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है। लोक निर्माण विभाग, नगर निगम व अन्य संबंधित विभाग सड़कों की मरम्मत का कार्य जल्द करें इसके आदेश दिए हैं।

- विजय विश्वास पंत, डीएम

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