कानपुर, जेएनएन। शहर से प्रदूषण का दाग मिटाने के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के डॉक्टर आगे आए हैं। वह सरकारी एवं निजी स्कूलों में जाकर छात्र -छात्राओं को जागरूक करेंगे। उन्हें प्रदूषण के खतरे, उसके कारण तथा बचाव के उपाए बताएंगे।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वायु प्रदूषण में कानपुर देश ही नहीं विश्व में इस वर्ष भी नंबर वन है। शहर के दामन पर लगा यह दाग शर्मनाक है। इसे हम सब मिलकर ही मिटा सकते हैं। प्रदूषण से लड़ने के लिए सार्क सर्जिकल केयर सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. शिवाकांत मिश्र लंग्स केयर फाउंडेशन के डॉक्टर फॉर क्लीन एयर मुहिम के तहत दिल्ली में एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे। वहां डॉ. मिश्र को प्रदूषण के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाने के लिए यूपी का ब्राड एंबेसडर बनाया गया है।
मुहिम में शामिल हुए संगठन एसोसिएशन ऑफ सर्जन्स इन इंडिया, एसोसिएशन ऑफ फिजीशियंस ऑफ इंडिया, इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स, द फेडरेशन ऑफ ऑब्स एवं गायनकोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, इंडियन चेस्ट सोसाइटी, नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजीशियंस, द कॉर्डियोलॉजिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया, इंडियन रेडियोलॉजिकल एंड इमेजिंग एसोसिएशन, इंडियन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी, इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन, इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थीसियोलॉजिस्ट्स, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट और इंक्लेन ट्रस्ट इंटरनेशनल इस मुहिम में शामिल हुए।
वाहनों का धुंआ व धूल घातक
आइएमए भवन परेड में शनिवार को हुई प्रेसवार्ता में आइएमए अध्यक्ष डॉ. अर्चना भदौरिया, सचिव डॉ. बृजेंद्र शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष डॉ. शिवाकांत मिश्र एवं डॉ. वीसी रस्तोगी ने प्रदूषण की गंभीरता बताई। कहा, शहर में वायु प्रदूषण के विविध कारक हैं। इसमें ट्रैफिक जाम में फंसे वाहनों का धुआं, सड़कों की धूल और उड़ती निर्माण सामग्री घातक है। इससे फेफड़े छलनी हो रहे हैं। बच्चों में सांस संबंधी बीमारियां हो रही हैं।
वायु प्रदूषण रोकने के लिए उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एक बेहतरीन प्लान बनाया थी लेकिन क्रियान्वित नहीं किया। इसलिए सभी डॉक्टर जिलाधिकारी से मिलकर इस योजना को शुरू करने का आग्रह करेंगे। बच्चों को अस्थमा अटैक से बचाव के लिए पुस्तिका बढ़ते प्रदूषण से बच्चों को अस्थमा एवं सांस संबंधी समस्याएं हो रही है। उन्हें बचाने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के सहयोग से अस्थमा से बचाव की पुस्तिका दिल्ली में प्रकाशित की गई है। यह पुस्तिका स्कूलों में बांटी जाएगी। लोग जागरूक होंगे तो स्कूल में बच्चों को अस्थमा अटैक पड़ने पर स्थिति संभाल सकेंगे।