कानपुर, जेएनएन। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एलएलआर अस्पताल (हैलट) में गुर्दा रोगियों को अत्याधुनिक चिकित्सकीय सुविधा मुहैया कराने के लिए नेफरोलाजी यूनिट तैयार की गई है। यहां गुर्दा रोगियों के इलाज से लेकर डायलिसिस का बंदोबस्त किया गया है। मेडिसिन विभाग की डायलिसिस यूनिट को अपग्रेड किया गया है, जहां नियमित और मेटिनेंस डायलिसिस (दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस की जरूर) के लिए अलग-अलग कक्ष बनाए गए हैं। गुर्दा रोगियों के लिए 10 बेड का सभी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हाई डिपेंडेंसी यूनिट एचडीयू भी है, जहां आक्सीजन व वेंटिलेटर की सुविधा से हैं।

जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एलएलआर अस्पताल स्थित मेडिसिन विभाग में चार बेड की डायलिसिस यूनिट संचालित थी। जहां सिर्फ डायलिसिस की ही सुविधा मिल रही थी, इस यूनिट को मेडिसिन विभाग के चिकित्सक ही देख रहे थे। मेडिसिन विभागाध्यक्ष एवं उप प्राचार्य प्रो. रिचा गिरि के प्रयास से सुपर स्पेशलिस्ट विधा के नेफरोलाजिस्ट के आने से गुर्दा रोगियों के इलाज के लिए नेफरोलाजी यूनिट बनाई गई। जहां गुर्दा रोगियों के इलाज, देखभाल एवं भर्ती करने का बंदोबस्त भी किया गया है।

डायलिसिस यूनिट भी अपग्रेड : मेडिसिन विभाग की डायलिसिस यूनिट को भी अपग्रेड किया गया है। पहले यहां चार मशीनें ही थीं, अब यहां छह मशीनें लगाई गईं हैं। उसमें से चार मशीनों पर नियमित डायलिसिस होती है। वहीं मेंटिनेंस डायलिसिस के लिए अलग कक्ष में दो मशीनें लगाई गईं हैं, जहां गंभीर मरीजों की दूसरे-तीसरे दिन डायलिसिस की सुविधा है।

गुर्दा रोगियों के लिए एचडीयू : डायलिसिस यूनिट के बगल में ही गंभीर गुर्दा रोगियों के लिए 10 बेड का एचडीयू है, जहां अत्याधुनिक सुविधाएं हैं। जहां फाउलर बेड, आक्सीजन पाइप लाइन, मल्टी पैरामानीटर और वेंटिलेटर भी लगाए गए हैं। जहां गुर्दा रोगियों को मैनेज करने का इंतजाम है।

माइनर ओटी की तैयारी : गुर्दा रोगियों की डायलिसिस के लिए फिश्चयूला बनाना पड़ता है। इसके लिए माइन ओटी भी यहां बनाने की तैयारी है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। अभी मरीजों को एलएलआर अस्पताल से हृदय रोग संस्थान भेजना पड़ता है। 

Edited By: Akash Dwivedi