कानपुर, जेएनएन। कल्याणपुर के बारासिरोही में नहर के पास सीमेंट के विद्युत पोल से एक झोला लटक रहा था, जिसे देखकर लोगों के कदम ठिठक गए। झोले से किसी के रोने की आवाज आने पर कुछ लोगों ने खंभे से झोला उतारकर खोला तो देखने वालों के आंसू आ गए। झोले के अंदर देखने वालों के दिल पसीज गए और आंखें नम हो गईं। सूचना पर आई पुलिस भी नजारा देखकर सिहर गई। झोले के अंदर मिली नवजात बच्ची को तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया।

क्या बेटी होने की मिली सजा

मां! यह तुम्हारी मजबूरी थी या फिर मुझे बेटी होने की सजा मिली। कोई मां कैसे अपने कलेजे के टुकड़े को लावारिस छोड़कर जा सकती है? जिस बच्ची को नौ माह गर्भ में रखकर पाला-पोसा, उसे यूं छोड़कर चले जाने की कोई न कोई वजह जरूर होगी। लेकिन, मां तुम्हें यह भी ख्याल न आया कि जिसने अभी ठीक से आंखें भी नहीं खोली उसके साथ यह सुलूक ठीक रहेगा भी या नहीं। यह सवाल उस नवजात बच्ची के हैं जिसकी मां उसे जन्म देने के दूसरे दिन ही बेसहारा छोड़कर चली गई।

पुलिस ने अस्पतालों में की पूछताछ

पुलिस ने आसपास के अस्पतालों में भी पूछताछ की लेकिन बच्ची के परिजनों का पता नहीं चल सका। चौकी प्रभारी सुरजीत सिंह ने बच्ची को सीएचसी में भर्ती कराया, जहां से हालत गंभीर बता एलएलआर अस्पताल (हैलट) रेफर कर दिया गया। बाल रोग विभाग के डॉक्टरों के मुताबिक बच्ची काफी कमजोर लग रही है। फिलहाल हालत स्थिर है। नहर पटरी के पास रहने वाले राहुल व सुधांशु आदि ने बताया कि उन्होंने किसी को झोला टांगते नहीं देखा।

मां की गोद के बजाय नसीब हुआ अस्पताल का बिस्तर

जिस मासूम को मां की गोद, दुलार व प्यार मिलना चाहिए, उसे अस्पताल का बिस्तर मिला। डॉक्टरों के मुताबिक कई घंटे से मासूम के हलक में दूध की एक बूंद भी नहीं गई थी। कल्याणपुर थाना प्रभारी अश्विनी पांडेय ने बताया कि खंभे में लटके झोले से बच्ची के रोने की आवाज सुनकर रुके राहगीरों ने पुलिस को फोन कर की जानकारी दी। तब नवजात को अस्पताल पहुंचाया गया। उसे वहां कौन छोड़ गया, इसका पता लगाया जा रहा है।

Posted By: Abhishek

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