कानपुर, जेएनएन। क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डॉ. रिपुदमन सिंह ने कहा है कि बेटियां दो घरों में उजियारा करके उसे प्रकाशमय बनाती हैं। एक घर वो जहां पर उनका जन्म होता है और दूसरा वो जहां वह शादी के बाद जाती हैं। आत्मसम्मान, ममता व त्याग की मूर्ति इन बेटियों व महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत है। अगर बेटियां सशक्त होंगी तो देश का भविष्य भी उज्जवल होगा। वह क्राइस्ट चर्च डिग्री कॉलेज में नारी सशक्तिकरण के अंतर्गत 'सशक्त नारी सशक्त भारत' विषय पर वेबिनार में अपने विचार रख रही थी। इस दौरान ताइक्वांडो के राष्ट्रीय प्रशिक्षक प्रयाग सिंह ने छात्राओं को ऑनलाइन आत्मरक्षा के टिप्स भी दिए।

वेबिनार में मनोचिकित्सक डॉ. आलोक बाजपेयी ने कहा कि महिला सशक्तिकरण के लिए महिलाओं पर बंदिशें खत्म करनी होगी। उन्हें अपनी बात कहने का अधिकार मिलना चाहिए। इसकी शुरुआत घर से हो। अगर वह घर में अपनी बात खुलकर कह सकेंगी तो बाहर अगर उनसे साथ कुछ गलत होता है तो उसकी शिकायत कि स्वजनों से कर सकती हैं। कई बार झिझक के कारण महिलाएं घरवालों से शिकायत भी नहीं कर पाती हैं।

कॉलेज के वूमेन सेल की कनवीनर डॉ. शिप्रा श्रीवास्तव ने कहा की महिलाओं को अपने खानपान पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को इसके बारे में जागरूक करने की आवश्यकता है। कॉलेज प्राचार्य डॉ. जोसेफ डेनियल ने बताया कि उनके कॉलेज में छात्राओं को इसके बारे में लगातार जागरूक किया जाता है। कार्यक्रम संयोजक डॉ. मीत कमल ने बताया कि महिला सशक्तिकरण के लिए आवश्यक है कि छात्राएं इसके प्रति जागरूक हो। इस दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण की शपथ भी दिलाई।

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस