अनुज शुक्ल, कानपुर :

शहर में आधार लिंक कराने के नाम पर पर्सनल डाटा चुरा बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले साइबर ठगों ने सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह चिंता भारी हो गई है कि भ्रष्टाचार और संसाधन लीकेज रोकने के लिए आधार लागू करने को सही ठहराने की दलीलों के बीच बैंक खातों का सुरक्षा चक्र भेदने में गिरोह कैसे कामयाब हो गया। इसी आधार के डाटा के माध्यम से हजारों खातों से करोड़ों रुपये की ठगी की गई।

देश में नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट का अहम हिस्सा बनीं मोबाइल वॉलेट कंपनियों व बैंक खातों के डिजिटाइजेशन के दौरान साइबर ठग सुरक्षा की चूक का फायदा उठा रहे है। जिस फिंगर प्रिंट को सबसे सुरक्षित पासवर्ड माना जा रहा, ये ठग फिंगर प्रिंट की क्लोनिंग से बैंक और आधार कार्ड से पर्सनल डाटा हैक करने के बाद खातों से रकम उड़ा रहे।

यह है झोल

गिरोह आधार से लिंक कराकर लोगों का निजी पूरा ब्यौरा लेने के बाद बैंक एकाउंट हैक करता है। बैंक खाते से रकम पहले मोबाइल वॉलेट में, फिर उससे अपने खाते में डाल लेते हैं। मोबाइल वॉलेट कंपनी का एकाउंट बनाने के लिए एक मोबाइल नंबर की जरूरत के चलते फर्जी आइडी से सिम भी खरीदते हैं। इसका खुलासा पिछले दिनों स्वरूपनगर व ग्वालटोली में केस दर्ज होने पर हुआ। इससे पहले बिठूर में पुलिस इसे हल्के में लेते हुए चार लोग गिरफ्तार कर हाथ पर हाथ रख कर बैठ गई थी। जब ग्वालटोली के मामले में पड़ताल की गई तो फिंगर प्रिंट क्लोनिंग से हो रहे खेल का खुलासा हुआ। ऐसा ही मामला चकेरी में भी सामने आया था।

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केस एक

ग्वालटोली की पुष्पा पाल के खाते से पैसा निकल गया और उन्हें पता ही नहीं चला। जानकारी की गई तो एक मोबाइल वॉलेट एप के माध्यम से पैसा निकलने की बात पता चली। जांच में सामने आया कि पुष्पा के नाम से फर्जी सिम लेकर एकाउंट बनाया गया। जिसमें इनके खाते से पैसा निकला।

केस दो

बिठूर टिकरा निवासी अजीत कुमार के खाते से एक मोबाइल वॉलेट कंपनी के माध्यम से पैसा निकलने की बात सामने आई। पहले अजीत के नंबर का डुप्लीकेट सिम निकाला गया और बाद में उसके माध्यम से बैंक खाते को लिंक कराया गया था।

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धरपकड़ के बाद सड़क पर सिम बेचने वाले गायब

पुलिस की धरपकड़ शुरू होते ही गली-गली में सिम बेचने वाले गायब हो गए हैं। यही इस धंधे में जुड़े लोगों को फिंगर प्रिंट मुहैया कराते थे।

अचानक सिम बंद होते बैंक खाते का करा दें स्टाप पेमेंट

थोड़ी सी सावधानी आप को ठगी का शिकार होने से बचा सकती है। किसी अपरिचित से बैंक खाते की डिटेल व निजी ब्यौरा साझा न करें। मोबाइल नंबर बंद होने पर फौरन पुलिस और नेटवर्क प्रदाता से संपर्क करें। यदि आपको सिम बंद होने की सही जानकारी न मिले तो फौरन सभी बैंक एकाउंट की स्टाप पेमेंट करा दें और क्राइम ब्रांच के अधिकारियों से मिले। कोई भी आप के एकाउंट की जानकारी से आपके नाम से डुप्लीकेट सिम जारी कराकर मोबाइल वॉलेट का एकाउंट बनाकर आप के खाते की रकम उड़ा सकता है।

Posted By: Jagran

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