कानपुर, जेएनएन। अनुच्छेद 370 हटाने का विरोध कई वर्षों तक वही करते रहे, जिन्होंने कश्मीर के मुस्लिमों को पट्टी पढ़ाकर सत्ता का लाभ लिया। कश्मीर के लोगों को बरगलाते रहे। मजहब के आधार पर देश को तोडऩे की कोशिश करते रहे। अनुच्छेद 370 को हटाना या खत्म करना क्यों जरूरी है, इसकी वास्तविकता तो कभी समझी नहीं गई। जब मोदी सरकार ने कश्मीर पुनर्गठन बिल को पास कराया तो भी विरोध करने वालों को ही दिक्कतें हुईं। हालांकि केंद्र सरकार के इस फैसले से जम्मू-कश्मीर में बदलाव की आस जगी है। गुरुवार को स्वतंत्रता दिवस पर ये बातें कश्मीर मामलों के विशेषज्ञ सुशील पंडित ने कहीं।

वह नवाबगंज स्थित वीएसएसडी डिग्री कॉलेज में 'धारा 370 के बाद जम्मू-कश्मीर' विषय पर आयोजित विमर्श कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कॉलेज व विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी शाखा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा अभी तक जैसा माहौल कश्मीर में रहा उससे देश की अखंडता को चुनौती मिलने लगी। अलगाववाद और जेहाद पनपा पर इन परिस्थितियों से सभी आरपार पाना चाहते हैं। जो लोग वहां रह रहे हैं, वह अमन-चैन के लिए परेशान हो चुके हैं।

ऐसे में मोदी सरकार ने कश्मीर पुनर्गठन बिल को लागू कराने संबंधी जो कदम उठाया, उससे हालात बदलेंगे यह सभी सोच रहे हैं। मगर कितना परिवर्तन होगा, कब होगा, ये तो आने वाला समय ही बताएगा। युवाओं के पत्थरबाजी करने पर पूछे गए सवाल को लेकर कहा कि कश्मीर में शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित है। इसी के चलते ऐसी घटनाएं कश्मीर में होने लगी हैं। कार्यक्रम में पूर्वी क्षेत्र संघचालक वीरेंद्रजीत सिंह, प्राचार्य डॉ.छाया जैन, अविनाश चतुर्वेदी, नीतू सिंह, अश्वनी कुमार आदि मौजूद रहे।

Posted By: Abhishek