जागरण संवाददाता, कानपुर : देश के प्रधानमंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, व्हाट इज योर ग्रांड फादर नेम, छह का पहाड़ा ़ ़ ़जैसे आम सवालों का जवाब हिंदूपुर प्राइमरी स्कूल में पढ़ रहे कक्षा-6 के बच्चे नहीं दे सके, तो मंजू को बड़ा धक्का लगा। सोचा, जब इनकी बुनियाद ही मजबूत नहीं है तो यह आगे कैसे पढ़ेंगे और बढ़ेंगे। देश के भविष्य की नींव कमजोर देखकर उन्होंने कुछ शिक्षिकाओं की व्यवस्था भी की लेकिन बात नहीं बनी। जिसके बाद उन्होंने बीड़ा खुद उठाया। .. और पिछले तीन वर्षो से लगातार बच्चों की बुनियाद मजबूत करने में जुटी हैं।

आजाद नगर की मंजू सर्राफ एक संस्था के कार्यकर्ताओं के साथ निश्शुल्क चिकित्सा शिविर में चार वर्ष पूर्व बिठूर के ¨हदूपुर गांव गई थीं। इसी दौरान वह यहां के प्राइमरी स्कूल में कक्षा-6 में पहुंचीं। वहां बच्चों से किताब पढ़ने को कहा तो बच्चे नहीं पढ़ सके। इसके बाद उन्होंने कुछ सामान्य से सवाल पूछे, उनके जवाब भी उन्हे जैसे-तैसे मिले। यही हाल कक्षा सात के विद्यार्थियों के थे। उन्हें लगा प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाले ये विद्यार्थी तो अपना बेहतर भविष्य ही नहीं बना सकेंगे। इसके बाद उन्होंने एक हजार रुपये देकर गांव की ही एक लड़की को तैयार किया। इन बच्चों को स्कूल के बाद ट्यूशन मिलने लगी। मंजू प्रत्येक सप्ताह जाकर बच्चों का ट्रायल लेने लगीं। कुछ माह बाद भी सुधार नहीं दिखा। इसके बाद मंजू ने स्वयं बच्चों की बुनियाद मजबूत करने की ठानी। इसका में उनका साथ उनकी मित्र भारती भलोटिया, रेणु ककेरा, निशा अग्रवाल, ममता गुप्ता और जया तनेजा ने दिया।

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जिला पंचायत में मिली जगह

बच्चों को पढ़ाने के लिए सबसे पहले उन्हे स्थान की जरुरत थी। इसके लिए उन्होंने गांव प्रधान से बात की तो जिला पंचायत में जगह मिल गई। फिर उन्होंने अपनी मदद के लिए गांव की कुछ लड़कियों को प्रशिक्षित किया।

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प्रत्येक दिन 3 से 5 बजे तक लगती कक्षा

सप्ताह के प्रत्येक दिन दोपहर तीन बजे से शाम पांच बजे तक वह कक्षा लगाती हैं। शुरुआत में दस से 15 बच्चे आते थे लेकिन, वर्तमान में 80-90 बच्चे प्रतिदिन आते हैं। शनिवार को वह अवकाश रखती हैं। इस काम में उनकी प्रशिक्षित की गई छह लड़कियां पूरी मदद करती हैं।

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रविवार को लगती फन की कक्षा

पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास हो इसके लिए प्रत्येक रविवार को मंजू यहां फन की कक्षा लगाती हैं। जिसमे बच्चों को विभिन्न तरह के खेल, डांस, गीत-संगीत आदि का ज्ञान देती हैं।

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कंप्यूटर का प्रशिक्षण

यहां के बच्चों को वह कंप्यूटर भी सिखा रही हैं। इसके लिए एक कंप्यूटर शिक्षक को भी उन्होंने तैनात किया है। मंजू बताती हैं कि अब उनके बच्चों के आगे बड़े भी पीछे छूट जाएंगे।

By Jagran