कानपुर, जेएनएन। घाटमपुर क्षेत्र के नगेलिनपुर गांव स्थित नगेली माता का मंदिर सैकड़ों साल पुराना है। नगेली माता के मंदिर में भक्त नारियल, मिठाई का भोग लगाते हैं। क्षेत्र के करीब 10 गांवों के परिवार अपने बच्चों का छेदन, मुंडन व अन्य संस्कार नगेली देवी मंदिर में ही करते हैं। माता के दरबार में पहुंचने वाले हर भक्त की मनोकामना पूरी होती है।

मंदिर जाने का रास्ता : कानपुर-सागर राजमार्ग में पतारा क्षेत्र के धरमपुर बंबा से महज पांच सौ मीटर अंदर नगेलिनपुर गांव बसा है। गांव के लिए लिंक रोड गई है, जहां मां नगेली देवी का भव्य मंदिर स्थित है।

मंदिर का इतिहास : नगेली माता मंदिर की मीनारें व कलाकृति गुम्बद के आकार की बनी हैं। बाहर से इस मंदिर की संरचना को देखकर ऐसा लगता है कि इस मंदिर का निर्माण मुगल शासन काल में हुआ होगा। यह मंदिर करीब पांच सौ से छह सौ साल पुराना बताया जाता है। इस मंदिर के अंदर मां नगेली देवी की भव्य प्रतिमा स्थापित है।

जानें- क्या है मान्यता : संचितपुर गांव निवासी राधेश्याम मिश्रा बताते हैं कि नगेली देवी मंदिर के पीछे एक तलाब स्थित है। मान्यता है की तालाब के जल के स्पर्श मात्र से रोगों का निवारण होता है। वहीं भक्तों का मानना है की सच्चे दिल से मांगी हुई मुराद मां नगेली देवी पूरी करती हैं। नगेली देवी मंदिर में हर साल कार्तिक पूर्णिमा से अष्टमी तक मेले का आयोजन होता है। वहीं, नवरात्रि में दूर-दूर से भक्त इस प्राचीन मंदिर में पूजन करने आते हैं।

-नगेली माता की आसपास के गांवों में रहने वालों पर असीम कृपा है। माता के मंदिर में हर साल आठ दिन का विशाल मेला लगता है। मां के मंदिर में आकर शांति मिलती। -कृष्ण कुमार मिश्रा, पुजारी

-नगेली माता मंदिर के पीछे स्थित तालाब के पानी से लोगों के रोग दूर होते हैं। मां के दरबार में आने वाले भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। -दिनेश कुमार, भक्त

Edited By: Abhishek Agnihotri