कानपुर, जेएनएन। एंटी रोमियो स्क्वाड स्कूल कालेजों के आसपास गश्त कर चंद चेतावनी पत्र भरते रहे और बेलगाम शोहदे गलियों और गांवों में युवतियों और छात्राओं का जीना मुहाल कर रहे हैं। घाटमपुर में सगे भाइयों की छेड़छाड़ व धमकी से तंग आकर छात्रा के जान देने का मामला कोई पहला नहीं है। पिछले दो साल में शहर में ही चार छात्राओं की छेड़छाड़ के चलते ही जान चली गई। इसमें रायपुरवा, पनकी, कल्याणपुर क्षेत्र के मामले हैं। वहीं एक युवती ने तो जान देने के लिए पनकी नहर में छलांग लगा दी थी। लगातार वारदातों के बाद भी पुलिस की गश्त उन रास्तों व गलियों तक नहीं है, जहां छात्राएं और महिलाएं शोहदों की मनमानी के कारण सिर झुकाकर चलने पर मजबूर हैं। यही नहीं हाल ये है कि तमाम मामलों में तो पुलिस खुद ही पीडि़ता को कोर्ट कचहरी का भय दिखाकर शांत करा देती है।

केस 1 : जून 2019 में पनकी के महावीर नगर में शोहदे ने बीटीसी छात्रा से दोस्ती की और शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण किया। पीडि़ता के शिकायत करने के बाद भी पुलिस टरकाती रही। मजबूर हो छात्रा ने फांसी लगाकर जान दे दी। इसके बाद पुलिस हरकत में आई। दारोगा को निलंबित कर आरोपित को जेल भेजा था। 

केस 2 : जून 2019 में ही शोहदे से परेशान होकर पनकी गंगागंज की एक छात्रा ने पनकी नहर में कूदकर जान देने का प्रयास किया था। नहर में नहा रहे एक युवक ने छात्रा की जान बचाई और कंट्रोल रूम को सूचना दी थी। पुलिस छात्रा को थाने ले गई और स्वजनों को बुलाकर उनके सुपुर्द कर दिया गया। 

केस 3 : रायपुरवा में भी एक किशोरी से तीन युवकों ने दुष्कर्म किया था। पीडि़ता ने कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने रिपोर्ट तो लिखी लेकिन कार्रवाई नहीं की। इससे क्षेत्र की महिलाओं ने किशोरी को ताने दिए और परेशान होकर पीडि़ता ने खुदकशी कर ली। तब पुलिस जागी और आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 

केस 4 : पिछले माह नौबस्ता के यशोदा नगर में एक शोहदे की धमकी से सहमी छात्रा ने स्कूल जाना छोड़ दिया था। अधिकारियों से शिकायत होने के बाद पुलिस ने मुकदमा तो लिखा लेकिन कार्रवाई से पहले ही दोबारा आरोपित ने छात्रा से छेड़छाड़ कर धमकी दी। तब पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। 

तीन गुना हो गईं छेड़छाड़, दुष्कर्म की 47 घटनाएं

महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाओं में इस साल अप्रत्याशित इजाफा हुआ है। एक जनवरी से 31 अक्टूबर के बीच ही करीब 140 मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वहीं तमाम मामलों में तो पीडि़ताओं को टरका दिया गया है। इसके साथ ही दुष्कर्म की भी 47 वारदात पुलिस की नाकामी को उजागर कर रही है। हालांकि पुलिस ने इन मामलों में कार्रवाई की लेकिन घटनाओं की रोकथाम के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए।

महिला संबंधी अपराध (अप्रैल से अक्टूबर तक)

हत्या - 22

शीलभंग - 276

अपहरण - 230

छेड़छाड़ - 140

उत्पीडऩ - 680

छिनैती - 43

दुष्कर्म - 47

दहेज मृत्यु- 50

आत्महत्या- 08

दुष्कर्म संग हत्या- 01

सामूहिक दुष्कर्म- 01 

Posted By: Abhishek

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