श्रीप्रकाश के कार्यकाल में बदला कानपुर शहर का स्वरूप, श्रमशक्ति से लेकर फ्लाइट की सुविधा दीं, पढ़ें उनकी उपलब्धियां
कानपुर शहर को श्रीप्रकाश जायसवाल के कार्यकाल में कई सौगातें मिलीं। उन्होंने श्रम शक्ति और उद्योग नगरी जैसी ट्रेनों की शुरुआत करवाई, जिससे दिल्ली और मुंबई के लिए सीधी कनेक्टिविटी मिली। इसके अतिरिक्त, उन्होंने हवाई सेवा को पुनर्जीवित किया और गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बिजली उत्पादन के क्षेत्र में भी उन्होंने कई परियोजनाएं शुरू करवाईं, जिससे कानपुर ऊर्जा का केंद्र बन गया।
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जागरण संवाददाता, कानपुर। औद्योगिक स्वर्णिम काल के लिए पहचाने जाने वाले कानपुर को नाम तो बहुत मिला लेकिन इसके पास अपनी कोई ट्रेन नहीं थीं। कानपुर की गलियों में घूम-घूम कर बड़े हुए श्रीप्रकाश जायसवाल को यहां की जनता की यह पीड़ा बखूबी मालूम थी, इसीलिए उन्होंने श्रम को सीधे दिल्ली की पावर से जोड़ा और ट्रेन का नाम ही श्रम शक्ति रखवाया। वह इतने पर नहीं रुके।
कानपुर से मुंबई के लिए भी कोई ट्रेन नहीं थी और यहां के लोगों को पीछे से आने वाली ट्रेनों में किसी तरह धक्के खाते हुए जाना पड़ता था। कानपुर भी उद्योगों का शहर था और मुंबई भी इसलिए कानपुर से मुंबई के लिए जो ट्रेन चली उसका नाम उन्होंने उद्योग नगरी रखवाया। बाद में इस ट्रेन को प्रतापगढ़ तक बढ़ा दिया गया। इसके अलावा चित्रकूट एक्सप्रेस भी उन्हीं के प्रयासों का नतीजा रही।
श्रम शक्ति एक सितंबर 2002 को चली और यह कानपुर से सीधे दिल्ली जाने वाली एकमात्र ट्रेन थी। हालांकि बाद में इसमें भी पनकी धाम स्टेशन जोड़ा गया है। जिस समय यह ट्रेन चली नीतिश कुमार रेलवे मंत्री थे और वह ट्रेन का उद्घाटन करने आए थे। वह यहां बोले भी थे कि आपके सांसद इतनी बार आए हैं कि आखिर ट्रेन चलवानी ही पड़ी। वहीं उद्योग नगरी को उन्होंने 2009 में चलवाया।
बात यहीं नहीं रुकी। कानपुर से दिल्ली के लिए चलने वाली फ्लाइट रुक चुकी थीं। श्रीप्रकाश जायसवाल अपने प्रयासों से यहां फ्लाइट लेकर आए और कानपुर एक बार फिर आम जनता के लिए हवाई जहाज के संचालन वाला शहर बन गया। उनके केंद्रीय मंत्री रहते हुए ही चार नवंबर 2008 को गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित किया गया जो गंगा के किनारे बसे कानपुर के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहा।
कानपुर में पनकी पावर हाउस होने के बाद भी उन्होंने यहां और पावर हाउस देने के प्रयास जारी रखे और आखिरकार घाटमपुर में नेवेली पावर प्लांट की स्थापना की गई। 2016 में इस पावर प्लांट ने विद्युत उत्पादन की शुरुआत भी कर दी है। बिल्हौर में नेशनल थर्मल पावर कारपोरेशन द्वारा संचालित सोलर पावर प्लांट भी श्रीप्रकाश जायसवाल ने ही शुरू कराया था। इसके चलते ही आज कानपुर बिजली ऊर्जा का बड़ा केंद्र बन चुका है। इसके पास पनकी, बिल्हौर और घाटमपुर में पावर प्लांट हैं।
कानपुर से गुजरने वाला रामादेवी हाईवे भी उनके ही कार्यकाल में चौड़ा किया गया। साथ ही फ्लाईओवर भी उनके कार्यकाल की ही देन है। इससे शहर के लोगों को यात्रा करना काफी सुगम हुआ और भारी वाहनों के लिए फ्लाईओवर के ऊपर से निकलने का रास्ता बन गया। इससे भी शहर के अंदर ट्रकों का आना कम हो गया।
रेल ओवरब्रिज की बात करें तो उन्होंने कैंट में शिव नारायण टंडन सेतु बनवाया। वहीं सीओडी का रेल ओवरब्रिज उनके कार्यकाल में ही बनना शुरू हुआ लेकिन वह काफी लंबे समय तक विभागीय विवादों में फंसा रहा। इसका शिलान्यास 2007 में हुआ था। श्याम नगर टू लेन पुल भी उन्होंने बनवाया जिससे जीटी रोड और नौबस्ता का फ्लाईओवर आपस में बना। उन्होंने केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान ही कानपुर-अलीगढ़ रोड़ चौड़ीकरण की मंजूरी केंद्र सरकार से दिलाई थी। हालांकि इसका चौड़ीकरण बाद में हुआ।

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