राहुल शुक्ल, कानपुर

रिश्ता भले ही खून का नहीं है लेकिन उससे कहीं बढ़कर है। दिव्यांग बच्चों की ये मां उन पर नेह लुटाती हैं और जब वह उनके पास होती हैं तो बच्चे अपना दर्द भूल जाते हैं। वह बच्चों की शारीरिक क्षमता बढ़ाने के लिए रेकी, एक्यूप्रेशर व रिफ्लेक्सोलॉजी से इलाज करती हैं और पढ़ाई का इंतजाम भी। बच्चों को भी लगता है कि उनकी पूरी दुनिया इसी मां के आंचल में ही सिमट आई है।

संवेदना और सेवा का जज्बा रखने वाली दिव्यांग बच्चों की ये मां सिविल लाइंस की अमित कौर हैं। वैसे तो सिविल लाइंस निवासी अमित कौर पिछले बीस वर्ष से रेकी, एक्यूप्रेशर व रिफ्लेक्सोलॉजी से लोगों का इलाज कर रही है लेकिन दो वर्ष पूर्व दिव्यांग डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा लगाए गए शिविर ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी। बच्चों द्वारा बनी सामग्री देख उनकी क्षमता का आकलन कर वह हैरान रह गईं। मन ही मन तय कर लिया कि इन बच्चों की प्रतिभा को परवाज देनी है। इसके बाद से दिव्यांग बच्चों की नि:शुल्क सेवा का प्रण ले लिया।

अब वह दिव्यांग डेवलपमेंट सोसाइटी में सप्ताह में दो बार दिव्यांग बच्चों को देखने जाती हैं। जरूरतमंद बच्चों को इन विधियों से इलाज भी देती हैं ताकि वह भी समाज के सामान्य बच्चों के साथ कदमताल कर मजबूत भविष्य गढ़ सकें। इतना ही नहीं उनकी पढ़ाई पर अपनी आय का एक हिस्सा भी खर्च करती हैं। वह बच्चों को विविध सामग्री बनाने और शिविर लगाने में भी सहयोग करती हैं ताकि दुनिया उनकी प्रतिभा से रूबरू हो।

बच्चों की बात समझने को लेंगी प्रशिक्षण

अमित कौर कहती हैं कि अभी कई बार बच्चों की बात समझ नहीं पाती हैं। बच्चों की बात समझने को प्रशिक्षण लेने की तैयारी कर रही हैं ताकि उनके मन की बात उनके इशारों से समझ सकें।

परिवार करता भरपूर मदद

वह बताती हैं कि जब परिवार को इन बच्चों के बारे में बताया तो परिजन खुशी-खुशी तैयार हो गए। आज उनके पति कुलदीप सिंह ही नहीं दोनों बेटियां शिवलीन व एशलीन भी उनकी मदद करती हैं।

Posted By: Jagran