कानपुर देहात, [अंकित त्रिपाठी]। मम्मी अब तो हम स्कूल भी जाने लगे हैं, अच्छे बच्चे बन गए हैं। फिर पापा क्यों नहीं आते हैं। मम्मी, पापा शहीद हो गए...तो क्या इतने दिनों बाद भी नहीं आएंगे...? हम गांव जा रहे हैं क्या वहां पापा मिलेंगे। वो हमसे गुस्सा हैं इसीलिए बात नहीं करते। पहले पापा का फोन आता था, अब फोन भी नहीं आता। चंद मिनटों में ही नन्हें आयुष ने पिता श्यामबाबू की याद में मां से कई सवाल कर दिए।

डेरापुर तहसील के रैंगवा निवासी राम प्रसाद के बड़े बेटे श्याम बाबू 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। नौकरी के कारण उनकी पत्नी रूबी अकबरपुर कस्बे में ही निवास करती हैं। शहीद श्याम बाबू की बरसी पर गांव में होने वाले हवन व अन्य कार्यक्रम से एक दिन पूर्व रूबी अपने पांच वर्षी पुत्र आयुष व डेढ़ वर्षीय बेटी आयुषी को लेकर गांव रवाना हो गर्इं, लेकिन घर से निकलने के दौरान पुत्र के सवालों में वह स्वयं निशब्द हो गर्इं।

मम्मी अब तो हम स्कूल भी जाने लगे हैं, अच्छे बच्चे बन गए हैं। फिर पापा क्यों नहीं आते हैं। मम्मी, पापा शहीद हो गए...तो क्या इतने दिनों बाद भी नहीं आएंगे...? हम गांव जा रहे हैं क्या वहां पापा मिलेंगे...? वो हमसे गुस्सा हैं इसीलिए बात नहीं करते। पहले पापा का फोन आता था, अब फोन भी नहीं आता। पापा कहते थे कि स्कूल जाने वाले बच्चे अच्छे होते हैं, अब तो मैं स्कूल भी जा रहा हूं, बेटू स्कूल नहीं जाती है। फिर मुझसे बात क्यों नहीं करते।

बेटे आयुष (लकी) ने चंद मिनटों में ही मां रूबी से कई सवाल कर दिए, जिससे उनकी आंखें छलछला आईं। अपने आंसू छुपाते हुए उन्होंने बेटे को समझाया कि पापा ड्यूटी पर गए हैं। छुट्टी नहीं मिल रही, इसलिए घर नहीं आए हैं। छुट्टी मिलने पर घर जरूर आएंगे। रूबी ने बताया कि आयुष का एडमिशन नर्सरी में कराया है। हालांकि डेढ़ वर्षीय बेटी आयुषी इस सबसे अपरचित ही नजर आई। उन्होंने बताया कि गांव में हवन का कार्यक्रम रखा है, इसलिए जल्दी निकलना है। गांव से परिवार व समाधि स्थल पर पहुंचने वाले लोगों के फोन भी आ रहे हैं।

Posted By: Abhishek

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