कानपुर, जेएनएन। सेंट्रल स्टेशन पर मेमू ट्रेन क्यों दुर्घटनाग्रस्त हुई? सुबह से लेकर शाम तक हर जुबां पर यही सवाल था। आखिर वह कौन से कारण थे, जिनकी वजह से अचानक दो कोच बेपटरी होकर दूसरे ट्रैक पर पहुंच गए। शुरुआती जांच में दो तथ्यों के अलावा कोई बड़ा कारण सामने नहीं आया, लेकिन दुर्घटनाग्रस्त कोच से अंतिम कोच तक प्रभावित हुए 71 स्लीपर हादसे की वजह सामने लाने में बड़ी भूमिका अदा करेंगे।

कुछ यूं रहा घटनास्थल का सीन

रेलवे ट्रैक के डायमंड प्वाइंट 129 पर दुर्घटना हुई। डायमंड प्वाइंट ऐसा स्थान है, जहां से ट्रेन के प्लेटफार्म का निर्धारण होता है। इस प्वाइंट से प्लेटफार्म नंबर दो, तीन, चार और पांच के लिए ट्रेनों को पास किया जाता है। थोड़ा आगे कैंची है, जहां से दो ट्रैक बनते हैं। एक ट्रैक प्लेटफार्म नंबर दो व तीन और दूसरा ट्रैक प्लेटफार्म नंबर चार व पांच को जाता है। मेमू को प्लेटफार्म नंबर तीन पर ले जाया जाना था। ट्रेन के पांच कोच तो प्लेटफार्म नंबर तीन वाले वाले ट्रैक पर गए, लेकिन इसके पीछे वाला कोच का ट्रैक बदल गया और वह प्लेटफार्म नंबर चार-पांच की ओर चल पड़ा। अधिकारियों ने दिन भर उस हिस्से को खंगाला जहां ट्रेन डिरेल हुई और क्षतिग्रस्त कोच जाकर रुका।

घंटों चली जांच में मिले दो क्लू

शुरुआती जांच में फिलहाल दो क्लू मिले हैं। पहला, डिरेल हुए एक कोच में ब्रेक शू नहीं मिले। माना जा रहा है कि प्लेटफार्म पर रुकने के लिए जब चालक ने ब्रेक लगाई होगी तो ब्रेक बैलेंस न होने की वजह से झटके में पहिया दूसरे ट्रैक पर चला गया। दूसरा, एक प्वाइंट मशीन के अंदर बेयङ्क्षरग टूटी मिली है। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि ट्रैक चेंजओवर में गड़बड़ी हादसे का कारण बनी हो। हालांकि अधिकारियों ने इन दोनों ही वजह को मुख्य कारण मानने से इन्कार किया है।

चार सदस्यीय समिति करेगी जांच

हादसे की जांच को चार सदस्यीय समिति बनाई गई है। स्टेशन डायरेक्टर हिमांशु शेखर उपाध्याय ने बताया कि समिति के अध्यक्ष डिप्टी चीफ सेफ्टी ऑफिसर यांत्रिकी आरके जाटव होंगे, जबकि दो सदस्य सेफ्टी विभाग के अधिकारी हैं। चौथे सदस्य सीनियर डिविजनल इलेक्ट्रिक इंजीनियर कोचिंग हैं।

Posted By: Abhishek

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