जागरण संवाददाता, कानपुर : कानपुर मेट्रो के सिग्नल काम करने लगे हैं। डिपो और मेट्रो रूट पर रेड, ग्रीन और वायलेट रंग के सिग्नल की टेस्टिंग शुरू हो गई है। अब जल्द ही इन पर मेट्रो चलाने की तैयारी है।

कानपुर मेट्रो के आइआइटी से मोतीझील तक के प्राथमिक कारिडोर पर ट्रायल रन नवंबर से शुरू हो जाएगा। इसे देखते हुए सिग्नल सिस्टम की टेस्टिग का काम शुरू कर दिया गया है। पालीटेक्निक स्थित मेट्रो डिपो में पहले ट्रेन सेट को टेस्टिग के लिए तैयार किया जा रहा है। टेस्टिग से पहले सिग्नल सिस्टम को चार्ज कर परीक्षण की प्रक्रिया चालू कर दी गई है। इस प्रक्रिया को 'सिग्नल पावर आन टेस्ट' कहा जाता है। मेट्रो डिपो में 29 सिग्नल लगने हैं। इनमें से 27 सिग्नल लगा दिए गए हैं। नौ किमी लंबे रूट पर 43 में से 35 सिग्नल लगा दिए गए हैं। अब मोतीझील स्टेशन पर सिग्नल लगाने का काम चल रहा है। बाकी आठ स्टेशन और मेट्रो ट्रैक पर सिग्नल लगा दिए गए हैं।

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सिग्नल के रंग

मेट्रो ट्रैक पर लगे सिग्नल लाल, बैंगनी (वायलेट) और हरे रंग के होंगे। लाल रंग ट्रेन को रुकने का संकेत देगा। बैंगनी रंग का सिग्नल होने पर ट्रेन को एक निर्धारित गति सीमा पर आगे बढ़ने की अनुमति होगी। इस रंग का संकेत तब मिलता है, जब ट्रैक पर कुछ ही दूरी पर दूसरी ट्रेन भी मौजूद हो। हरा रंग रूट पूरी तरह क्लियर होने का संकेत देगा और ट्रेन अपनी पूरी गति के साथ आगे बढ़ सकेगी।

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सफेद रंग का भी होगा सिग्नल

डिपो में ट्रेन के मूवमेंट के निर्धारण के लिए सफेद रंग का भी सिग्नल होता है। इस सिग्नल में लगीं तीन लाइटों में दो, जब ऊध्र्वाकार जलती हैं तब ट्रेन के लिए रुकने का संकेत होता है और जब दो लाइटें 45 डिग्री के कोण पर जलती हैं, तब ट्रेन के लिए चलने का संकेत होता है। इस सिग्नल को 'शंट सिग्नल' कहा जाता है।

Edited By: Jagran